जेएनयू में 9 फरवरी को लगे देश विरोधी नारों के मामले की जांच कर रही टीमों ने कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों और कुछ प्रोफेशनल्स की भी पहचान की है. ये लोग जेएनयू में कार्यक्रम के दौरान देश विरोधी नारे लगा रहे थे.
इस मामले में जेएनयू की हाईलेवल इंक्वायरी कमेटी की आंतरिक रिपोर्ट में भी 'बाहरी' लोगों की ओर से नारे लगाए जाने का जिक्र किया गया था. यह कार्यक्रम आतंकी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के खिलाफ आयोजित किया गया था.
नारे लगाने वालों की पहचान फिलहाल गोपनीय
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने चार लोगों की पहचान की है, जिनमें एक महिला भी शामिल है. ये सभी कश्मीरी बताए जा रहे हैं. इन्होंने भीड़ को देश विरोधी नारे लगाने के लिए उकसाया और खुद भी नारेबाजी की. मामले की जांच जारी है इस वजह से अब तक उनके नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं.
दो भाई भी हैं शामिल
बता दें कि अफजल गुरु को साल 2001 में संसद भवन पर हमले के आरोप में दोषी ठहराया गया था और फांसी की सजा दी गई थी. मामले की जांच कर रहे एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में दो भाई शामिल हैं, जिन्होंने भीड़ को गुमराह किया. दोनों की पहचान कई वीडियो के जरिए हुई है. इनमें से एक जेएनयू का छात्र है, जबकि दूसरा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का छात्र है. इनके अलावा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिला मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की भी पहचान की गई है.
एक NGO से जुड़ा शख्स भी संदेह के घेरे में
इसके साथ ही पुलिस ने उन प्रोफेशनल्स की भी पहचान की है जो घटना के दौरान कैंपस में मौजूद थे. पुलिस ने देशद्रोह के आरोप में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को को गिरफ्तार किया था. फिलहाल ये तीनों अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने जिन लोगों की पहचान की है उनमें से एक जर्नलिस्ट है, जो एक एनजीओ से जुड़ा हुआ है और एएमयू का छात्र रह चुका है. देश विरोधी नारे लगाने वालों में वह भी शामिल था.