अपने सभी कार्यक्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए, इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) ने 2014-15 में 1,141 करोड़ रुपये की तुलना में, 2015-16 में 1,506 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. इस तरह इस साल उसके कारोबार में 32 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.
इस अवधि के दौरान कंपनी को पिछले साल 131 करोड़ रुपये की तुलना में 189 करोड़ रुपये का विशुद्ध लाभ होने का अनुमान लगाया गया था. कंपनी की वार्षिक आम बैठक में पेश की गई 17वीं वार्षिक रिपोर्ट (2015-16) के अनुसार आईआरसीटीसी की नेट वर्थ 542.07 करोड़ रुपये हो गई है जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 444.25 करोड़ रुपये रही थी.
कर पूर्व लाभ में 44 फीसदी की बढ़ोतरी
आईआरसीटीसी को वित्त वर्ष 2015-16 में कर पूर्व लाभ 308.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 188.63 करोड़ रुपये (पिछले वर्ष में 130.63 करोड़ रुपये) रहा. इस प्रकार, दोनों में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज
की गई. ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2015-16 में 329.32 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले वर्ष में ये 235.45 करोड़ रुपये था.
इस साल 35.23 विदेशी मुद्रा की कमाई
इसके अलावा, आईआरसीटीसी ने साल 2015-16 में 75.45 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है जबकि कंपनी ने वर्ष 2014-15 में 26.13 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था. कंपनी ने हाल ही में आतिथ्य और आउटबाउंड
पर्यटन में कदम रखा है, इससे इसे 2015-16 में 35.23 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा की कमाई हुई जबकि इससे पहले के साल में 21.89 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा की कमाई हुई थी.
सीएमडी ने कामकाज पर जताया संतोष
आईआरसीटीसी की आय को अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से देखें तो इंटरनेट टिकटिंग में 43 प्रतिशत, उसके बाद पर्यटन में 26 प्रतिशत, खानपान विभाग में 18 प्रतिशत, रेल नीर या डिब्बाबंद पेयजल में 8 प्रतिशत और लाइसेंसधारी खानपान में 5 प्रतिशत की आय रही. आईआरसीटीसी के सीएमडी डॉ. ए. के. मनोचा ने आईआरसीटीसी के सभी कार्यक्षेत्रों के कामकाज पर संतोष जताते हुए कहा, 'कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान
अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है.
दो साल लगातार 'उत्कृष्ट' रेटिंग
कंपनी ने साल 2015 में भारत सरकार से 'उत्कृष्ट' एमओयू रेटिंग प्राप्त की और यह वित्तीय वर्ष 2016 के लिए इस रेटिंग को बनाए रखने के लिए तैयार है.' डॉ. मनोचा ने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि कंपनी, लगातार दूसरे वर्ष के लिए प्रतिष्ठित फॉर्च्यून इंडिया की अगली 500 भारतीय कंपनियों की सूची में जगह बना रही है जबकि इसने अपनी रैकिंग में वर्ष 2015 में 328 से सुधार करते हुई 199 कर ली है.