गुजरात में इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी राजेंद्र कुमार की भूमिका को लेकर उठे विवाद का मुद्दा मंगलवार को एक संसदीय समिति की बैठक में भी उछला जहां बीजेपी के सदस्यों ने दावा किया कि मुठभेड़ में मारे गये चारों लोग लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे.
गृह मंत्रालय के लिए परामर्श समिति की बैठक में बीजेपी सदस्य विनय कटियार और योगी आदित्य नाथ ने कहा कि आईबी के विशेष निदेशक पर निशाना साधने से उन अधिकारियों का मनोबल गिरने का खतरा है जो राष्ट्र विरोधी तत्वों को दूर करने के लिए अथक कार्य करते हैं.
बैठक में शामिल हुए एक अधिकारी के मुताबिक बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि इशरत आतंकवादी थी और उसका नाम लश्कर-ए-तैयबा की वेबसाइट पर आया था और मुठभेड़ के वक्त वह दो ज्ञात पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ थी.
उन्होंने कहा कि खबरों के अनुसार कुमार को गिरफ्तार करने और उन पर अभियोजन चलाने का सीबीआई का कदम आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई को बाधित ही करेगा.
कटियार ने कहा, ‘इशरत ज्ञात रूप से आतंकवादी थी. वह फैजाबाद गयी थी और लश्कर की सदस्य थी. जिस तरह से आईबी अधिकारी को परेशान किया जा रहा है, इससे केवल आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई कमजोर ही होगी और कल कोई खुफिया अधिकारी सूचना साझा नहीं करेगा.’
समिति के अन्य कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता आतंकवाद से निपटने के प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं.
आदित्यनाथ, कटियार और सपा के सदस्य रामगोपाल यादव तथा अन्य सदस्यों ने कहा कि अकसर मानवाधिकार कार्यकर्ता देश की सुरक्षा से समझौता करते हुए आतंकी गतिविधियों और आतंकवादियों से जुड़े मुद्दे उठाते हैं.