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आसमान में भारत की 'तीसरी आंख', अब चीन-PAK की चालबाजियों पर 24 घंटे रहेगी नजर

शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है. ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे 'आई इन द स्काई' भी कहा जा रहा है.

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भारत-चीन बॉर्डर की फाइल फोटो
भारत-चीन बॉर्डर की फाइल फोटो

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भारत ने शुक्रवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. सुबह 9.28 पर इसरो ने श्रीहरिकोटा से 31 उपग्रहों की लॉन्च किया. इसी के साथ ही इसरो के उपग्रहों का शतक पूरा हो गया है. शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है. ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे 'आई इन द स्काई' भी कहा जा रहा है.

क्यों घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान?

इस उपग्रह के जरिए धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं. बॉर्डर पर आतंकियों की गतिविधियों पर नज़र रखने में भारत को आसानी होगी. यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नज़र रखने के काम आएगा. इस उपग्रह की मदद से हम बॉर्डर पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं.

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आपको बता दें कि इसरो ने शुक्रवार सुबह 9.28 पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया. भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैं: कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं.

इसलिए भी है खास

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है. इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं. कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं.

बौखलाया पाकिस्तान

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है. इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा.

साल की पहली अंतरिक्ष परियोजना

चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है. अन्नादुरई ने कहा, "पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे."

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