इंडो-तिब्बतन पुलिस फोर्स (आईटीबीपी) ने उन जवानों को गैलेंटरी अवॉर्ड देने की अनुशंसा की है, जिन्होंने मई और जून, 2020 के महीनों में ईस्टर्न लदाख में चीनी सैनिकों के साथ झड़पों के दौरान बहादुरी से डटकर सामना किया था. आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देसवाल ने 21 गैलेंटरी अवॉर्ड की सिफारिश की है.
लद्दाख सीमा पर चीनी सैनिकों से झड़प के दौरान यह सैनिक न केवल ढाल बने, बल्कि चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों का डटकर मुकाबला किया और स्थिति को अपने नियंत्रण में रखा. इसके साथ ही आईटीबीपी जवानों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और सेना के घायल जवानों को वापस भी लाया.
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आईटीबीपी के इन जवानों ने चीनी सेना के खिलाफ पूरी रात लड़ाई लड़ी थी. जवानों ने पीएलए की ओर से किए गए पथराव का माकूल जवाब भी दिया. इन जवानों ने करीब 17 से 20 घंटे तक चीनी सेना का मुकाबला किया. खास बात है कि इस लड़ाई के दौरान आईटीबीपी के कम से कम जवान हताहत हुए.
इसके अलावा छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले 6 जवानों को भी गैलेंटरी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. अर्धसैनिक बलों ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले 318 आईटीबीपी कर्मियों और 40 अन्य केंद्रीय पुलिस फोर्स के जवानों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री विशेष पुरस्कार की सिफारिश की है.
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गौरतलब है कि जनवरी, 2020 से ही आईटीबीपी कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है. वुहान और इटली से लोगों को लाने के बाद छावला कैंप में सबसे बड़े क्वारनटीन सेंटर को बनाया गया था. इसके अलावा आईटीबीपी के पास 10 हजार बेड वाले सरदार पटेल कोविड केअर और राधास्वामी व्यास हॉस्पिटल के मैनेजमेंट की भी जिम्मेदारी है.