जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने बेटे की दस्तारबंदी रस्म के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं. बुखारी ने 19 साल के अपने छोटे बेटे शाबान बुखारी को अपना वारिस घोषित किया है. 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म के साथ उन्हें नायाब इमाम घोषित किया जाएगा. एक हिंदी अखबार ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है.
दस्तारबंदी की रस्म के लिए जिन लोगों को न्यौता भेजा गया, उनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह और शाहनवाज हुसैन का भी नाम है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं है.
बुखारी का कहना है कि देश के मुसलमानों में अब तक मोदी के प्रति विश्वास नहीं जागा है. नए इमाम की ताजपोशी के कार्यक्रम में बीजेपी के चार नेताओं गृह मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और राज्यसभा सांसद विजय गोयल को न्योता भेजा गया है.
इसके अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अभिषेक मनु सिंघवी, एसपी मुखिया मुलायम सिंह यादव और सीएम अखिलेश यादव भी मेहमानों की लिस्ट में हैं.
प्रधानमंत्री मोदी को न्यौता नहीं देने के सवाल पर बुखारी ने कहा, 'प्रधानमंत्री मुसलमानों के प्रतीकों का भी इस्तेमाल करने से कतराते हैं. उनके इस रवैये से मुसलमान उनसे नहीं जुड़ पाए हैं. मोदी को मुसलमानों में विश्वास जगाने के लिए आगे आना चाहिए.'