केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार कश्मीरी आतंकवादियों की वापसी के संबंध में समर्पण नीति के मसौदे पर काम कर रही है जो सीमा पार कर पाक अधिकृत कश्मीर चले गए हैं.
एकीकृत कमान की बैठक के बाद चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा ‘योजना (समर्पण नीति) पर काम किया जाना है. मैं राज्य सरकार से आग्रह करूंगा कि वह हमें जल्द से जल्द मसौदा प्रदान करे.’ उन्होंने कहा ‘हालांकि मैंने पहचान छानबीन जम्मू-कश्मीर वापसी सुगम बनाने और पुनर्वास जैसे कुछ बिन्दु चिह्नित किए हैं जिनका ध्यान रखा जाना है.’
गृहमंत्री ने कहा ‘इसमें समय लगेगा. हम योजना पर धर्य के साथ और सावधानीपूर्ण तरीके से काम करेंगे.’ चिदंबरम ने कहा कि यदि पाक अधिकृत कश्मीर जाने वाले युवा आतंकवाद छोड़ देते हैं तो उनकी राज्य वापसी और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने का विचार है.
यह पूछे जाने पर कि क्या समर्पण नीति ‘अघोषित कूटनीति’ का हिस्सा है, चिदंबरम ने कहा ‘इसमें नया कुछ भी नहीं है. वर्ष 1997-98 में सीआरपीएफ ने एक पूरी बटालियन (लगभग 1000 कर्मियों) को नियुक्त किया था, जो आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे थे.’ उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले 450 आतंकवादियों को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने नियुक्त किया था.
गृह मंत्री ने कहा ‘उत्तर पूर्व में भी ऐसी ही नीति है जहां हिंसा का त्याग करने वाले चरमपंथियों को स्थानीय पुलिस में शामिल किया जाता है.’ उन्होंने कहा ‘इसलिए, सीमा पार कर पाक अधिकृत कश्मीर में गए युवा अगर आतंक का रास्ता छोड़कर कानून का अनुपालन करने वाला नागरिक बनना चाहते हैं, तो उनकी वापसी का स्वागत करने में कोई बुराई नहीं है.’ गृह मंत्री ने कहा ‘हम काफी सतर्कता बरतेंगे. कोई भी काम जल्दवाजी में नहीं किया जायेगा.’
यह पूछे जाने पर कि क्या ऐसी ही नीति राह से भटके हुए पाकिस्तान गए पंजाबी युवाओं के लिए भी तैयार की जा रही है, उन्होंने कहा ‘हम जम्मू-कश्मीर की बात कर रहे हैं. अभी मैंने इस आयाम पर विचार नहीं किया है.’ समर्पण नीति पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया से जुड़े प्रश्न पर चिदंबरम ने कहा ‘मैं पाकिस्तान की ओर से इस विषय पर किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद क्यों करूंगा.’ केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद के विरोध के मद्देनजर इस विषय पर कांग्रेस में किसी तरह के मतभेद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा ‘इस विषय पर मतभेद है. {mospagebreak}
आजाद ने यह विषय इसलिए उठाया ताकि नीति तैयार करते समय इसे ध्यान में रखा जाए. मैंने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि सभी बिन्दुओं को ध्यान में रखा जायेगा.’ इस क्रम में गृह मंत्री ने कहा ‘अगर नक्सली हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर देते हैं, तो उनका भी पुनर्वास किया जायेगा.’ पाक अधिकृत कश्मीर से आतंकवादियों के लौटने के बाद हिंसा में वृद्धि से संबंधित प्रश्न के उत्तर में गृह मंत्री ने कहा ‘मैं इससे सहमत नहीं हूं. मैंने एक प्रक्रिया तय की है. मैं नहीं समझता कि इसमें कोई कठिनाई है.’ इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उनके साथ मौजूद थे.
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा ‘कुल मिलाकर जो स्थिति हैं उसके अनुसार जम्मू क्षेत्र पीर पंजाल के दक्षिण में काफी हद तक सामान्य स्थिति बहाल हो गई है. पीर पंजाल के उत्तरी क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है.’ चिदंबरम ने कहा ‘इस वर्ष 45 दिन की अवधि के दौरान 65 घटनाएं सामने आई हैं जो आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि को दर्शाती हैं. इस अवधि दौरान सात नागरिक मारे गए, नौ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए जबकि 24 आतंकवादियों का सफाया किया गया.’
उन्होंने कहा ‘कुल मिलाकर मैं जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में बेहतरी से संतुष्ट हूं. हम मानवाधिकार के उल्लंघन, सुरक्षा बलों या पुलिस की ओर से ज्यादती के मामले में कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति का पूरी तरह से अडिग हैं.’ श्रीनगर में बीएसएफ द्वारा एक किशोर की हत्या का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा ‘मैंने मुख्यमंत्री से कहा था कि संदिग्ध को 48 घंटे में पहचान करने का प्रयास किया जायेगा. हमने 48 घंटे में उसकी पहचान कर उसे निलंबित कर दिया तथा उसे पुलिस के हवाले कर दिया. यह वायदे को पूरा करने का अच्छा उदाहरण है.’ पुणे विस्फोट के तार पाकिस्तान से जुड़े होने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इसका उत्तर शहर के पुलिस आयुक्त देंगे.