सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर चल रही बहस ने अब एक अलग ही रुख ले लिया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि तीन तलाक का पिछले 1400 साल से जारी है. अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं. सिब्बल की इस बात पर बवाल बढ़ता दिख रहा है.
पहले रामसेतु पर हुआ था बवाल
कपिल सिब्बल और कांग्रेस पार्टी इस पहले भी राम के मुद्दे पर बयान देकर फंस चुके हैं. दरअसल, यूपीए 2 के दौरान रामसेतु के मुद्दे पर जब सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस सरकार ने बयान दिया था कि राम सेतु जैसी कोई चीज़ नहीं है, यह एक कोरी कल्पना है. उस समय भी सिब्ब्ल ही केंद्र सरकार की ओर से वकील थे.
और क्या बोले सिब्बल?
कपिल सिब्बल ने कहा कि इस्लाम धर्म ने महिलाओं को काफी पहले ही अधिकार दिये हुए हैं. परिवार और पर्सनल लॉ संविधान के तहत हैं, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है. जस्टिस कुरियन जोसेफ ने जब कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या कोई ई-तलाक जैसी भी चीज है.
आपको बता दें कि ट्रिपल तलाक को लेकर 11 मई से सुनवाई चल रही है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम सिर्फ ये समीक्षा करेंगे कि तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं. कोर्ट इस मुद्दे को इस नजर से भी देखेगा कि क्या तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं.