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पुणे हमले के पीछे आतंकियों का 'प्रोजेक्‍ट कराची'?

पुणे में बम धमाके के दो दिन बीत चुके हैं और जांच एजेंसियों की सुई रुक गई है इंडियन मुजाहिदीन पर. कहा जा रहा है कि पुणे का ब्लास्ट आईएम के प्रोजेक्ट कराची का हिस्सा था.

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पुणे में बम धमाके के दो दिन बीत चुके हैं और जांच एजेंसियों की सुई रुक गई है इंडियन मुजाहिदीन पर. कहा जा रहा है कि पुणे का ब्लास्ट आईएम के प्रोजेक्ट कराची का हिस्सा था.
 
शनिवार शाम, पुणे का लैंडमार्क जर्मन बेकरी बम धमाके से दहल उठा. नौ लोग मारे गए. 57 लोग अब भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. धमाके के तीन दिन बाद भी सवाल जस का तस है. कौन है इस धमाके के पीछे?
 
जांच एजेसियां तेजी से धमाके की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक पुणे में आतंकी हमला आईएम के प्रोजेक्ट कराची का पहला हमला हो सकता है. यह वही प्रोजेक्ट कराची है, जिसकी खबर आजतक ने दो हफ्ते पहले दी थी. यह बात अब पुख्ता होती जा रही है. सूत्रों के मुताबिक इंडियन मुजाहिदीन के दक्षिणी ब्रिगेड  का इस ब्लास्ट में हाथ हो सकता है. इस ब्रिगेड में अब्दुस सुभान कुरैशी, मोहसिन चौधरी, आमिर रजा खान, मुफ्ती सूफा पतंगिया, रसूल पार्टी जैसे आईएम के भगोड़े खूंखार आतंकी शामिल हैं.

दरअसल इंडियन मुजाहिदीन के प्रोजेक्ट कराची का सुराग डेविड कोलमन हेडली ने दिया था. अमेरिका में पकड़ा गया हडली इस वक्त एफबीआई के कब्जे में है. उसने पुणे समेत देश के कई शहरों की रेकी की थी. उसी ने एफबीआई को बताया था कि इंडियन मुजाहिदीन भटके हुए भारतीयों को ट्रेनिंग देकर हिन्दुस्तान के खिलाफ आतंक का जत्था तैयार कर रहा है. एफबीआई ने इस सूचना को भारतीय जांच एजेंसियों से शेयर किया था.

इसकी तस्दीक पिछले महीने कोलंबो में पकड़े गए मोहम्मद अमजद ख्वाजा ने भी कर दी थी. सूत्रों के मुताबिज ख्वाजा भी कराची प्रोजेक्ट का हिस्सा था, लेकिन वो रॉ के बिछाए जाल में फंस गया. इंडियन मुजाहिदीन पर जांच एजेंसियों के शक की एक और वजह ब्लास्ट का मोडस ओपेरेंडी है. पुणे में जिस तरह से ब्लास्ट हुए उनमें और आईएम के आतंकियों द्वारा किए गए पिछले कई धमाकों में समानता है.

पहली समानता तारीख की है. आईएम ने जब भी ब्लास्ट किए हैं वो या तो 13 तारीख को या फिर 26 तारीख को. 26/11 समेत पिछले पांच बड़े धमाके इन्हीं तारीखों को हुए, सिर्फ बैंगलोर का मामला अलग था, जहां 2008 में 25 जुलाई को धमाका हुआ था. यानी जांच एजेंसियां फिलहाल साजिश को खोलने में कामयाब हो गई हैं, लेकिन असली कामयाबी तब मिलेगी जब गुनहगारों तक उनके हाथ पहुंच पाएंगे.

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