मुंबई 26/11 के प्रमुख दोषी अजमल कसाब को 'ऑपरेशन बुद्धा स्माइल' के तहत बुधवार को फांसी दी गई. कसाब को फांसी देने की पूरी प्रक्रिया को 'ऑपरेशन बुद्धा स्माइल' नाम दिया गया था. जबकि पुलिस के लिए इस प्रक्रिया को 'ऑपरेशन एक्स' नाम दिया गया था.
कसाब की फांसी की प्रक्रिया को बहुत गुप्त रखा गया. इसी गुप्त प्रक्रिया को 'ऑपरेशन बुद्धा स्माइल' नाम दिया गया. इसे 'ऑपरेशन एक्स कोड' नाम देने का मकसद इससे जुड़ी जानकारियों को गुप्त रखना था. इसी 'ऑपरेशन बुद्धा स्माइल' के तहत कसाब को सोमवार को आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल लाया गया. बुधवार सुबह साढ़े सात बजे उसे फांसी दे दी गई.
अजमल कसाब की फांसी 5 नवंबर 2012 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा दया याचिका खारिज करने के बाद ही तय हो गई थी. गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा, '5 नवंबर को राष्ट्रपति ने पत्र को हस्ताक्षर करके भेज दिया था जिसके बाद 7 नवंबर को मैने भी हस्ताक्षर किया. 8 नवंबर को महाराष्ट्र सरकार को बताने के बाद 21 नवंबर को कसाब की फांसी तय हो गई थी.'