scorecardresearch
 

मंगल ग्रह पर जाने को उत्साहित है केरल की श्रद्धा प्रसाद, अंतिम दौर के लिए हुआ चुनाव

केरल की श्रद्धा प्रसाद का मंगल ग्रह में जाने का सपना अब पूरा होने की तरफ है. 19 साल की श्रद्धा का अंतिम दौर के लिए चयन हो गया है. इसके बाद वह हमेशा के लिए मंगल ग्रह में बसने चली जाएंगी.

Advertisement
X
मंगल जाकर रहेगी केरल की श्रद्धा प्रसाद
मंगल जाकर रहेगी केरल की श्रद्धा प्रसाद

केरल की श्रद्धा प्रसाद का मंगल ग्रह में जाने का सपना अब पूरा होने की तरफ है. 19 साल की श्रद्धा का अंतिम दौर के लिए चयन हो गया है. इसके बाद वह हमेशा के लिए मंगल ग्रह में बसने चली जाएगी.

Advertisement

श्रद्धा मेकैनिकल इंजीनियर है और भारत की अकेली उम्मीदवार है, जिसका चुनाव नीदरलैंड्स के मार्स-वन संस्था द्वारा अंतरिक्ष यात्री चयन प्रक्रिया के अंतिम दौर के लिए हुआ है्. इसके साथ तीन अन्य भारतीय भी हैं, लेकिन उनमें से दो अमेरिका से है और एक दुबई से है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, श्रद्धा कोयंबटूर के अमृता यूनिवर्सिटी में पढ़ती है. श्रद्धा ने कहा, 'मैं मंगल ग्रह में बसने के लिए बहुत उत्सुक हूं. अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी मेरा जुनून है. मुझे रोमांचक कुछ करने में हमेशा मजा आता है.'

श्रद्धा ने कहा, 'तीसरे राउंड की सफलता के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया है. मुझे 13 फरवरी को पता चला कि मेरा चुनाव हुआ है. मैं बहुत खुश थी, लेकिन हमें यह बताने की अनुमति नहीं थी. परिवार, दोस्तों को छोड़कर जाना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन जिंदगी में ऐसे सुनहरे मौके बार-बार नहीं आते और मैं इसे गंवाना नहीं चाहती.'

Advertisement

यह पूछे जाने पर कि उनके माता-पिता का अकेली बेटी का हमेशा के लिए मंगल ग्रह पर बसने को लेकर क्या नजरिया है पर श्रद्धा ने कहा, 'उन्हें लगता है कि मैं पागल हूं, लेकिन मैं नहीं हूं, मैं कुछ विलक्षण कर रही हूं. इसलिए वह चकित नहीं हैं.'

आपको बता दें कि 2,02,586 आवेदकों में से तीसरे राउंड के लिए 100 उम्मीदवारों का चयन हुआ था. इनमें से 24 का चुनाव मार्स-वन फॉर द मिशन ने किया. इस संस्था के सलाहकारों में दो भारतीय हैं. इनमें केआर श्रीधारा मूर्ति एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के पूर्व हेड हैं और दूसरे इसरो कमर्श‍ियल आर्म और एरोस्पेस एक्सपर्ट गौतम हरिहरण हैं.

मार्स-वन नीदरलैंड्स में नॉन प्रॉफिट संस्था है. इसका उद्देश्य मंगल ग्रह पर स्थाई मानव बस्ती बनाना है, इसलिए चयनित उम्मीदवारों को वन-वे ट्रिप देगी. इसकी मौजूदा योजना के मुताबिक शुरुआत में हर दो साल में चार लोगों को भेजा जाएगा, यह प्रक्रिया 2024 से शुरू होगी. पहली मानवरहित उड़ान साल 2018 में भरी जाएगी.

मार्स-वन के मुताबिक 50 पुरुष और 50 महिलाओं ने दूसरे राउंड को पास किया था. यहां दुनियाभर से उम्मीदवार आए थे, जिनमें 39 अमेरिका से थे, 31 यूरोप से, 16 एशिया, 7 अफ्रीका और 7 ओशिनिया से आए थे.

Advertisement
Advertisement