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केरल रेप हत्या केस: महिला आयोग ने उठाए कई सवाल

निर्भया कांड की गूंज जिस तरह से देश मे गूंजीं और समय रहते पुलिस प्रशासन से लेकर सरकार तक जाग गई. लेकिन केरल में निर्भया की तरह एक मासूम की दर्दनाक हत्या के बाद भी किसी की नींद नहीं टूटी है.

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निर्भया कांड की गूंज जिस तरह से देश मे गूंजीं और समय रहते पुलिस प्रशासन से लेकर सरकार तक जाग गई. लेकिन केरल में निर्भया की तरह एक मासूम की दर्दनाक हत्या के बाद भी किसी की नींद नहीं टूटी है.

पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
वैसे राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी सीधे तौर पर कहा है कि केरल की पुलिस और प्रशासन ने वहां हुई एक दलित छात्रा की रेप और हत्या के मामले की जांच में पूरी तरह से कोताही बरती है. आयोग की तीन सदस्यीय टीम केरल में जांच के लिए गई थी और वहां से लौटने के बाद आयोग अध्यक्ष ललिता कुमार मंगलम ने इस मामले की जांच सीबीआई या एक स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की है.

वारदात से बाद से लड़की की मां सदमे में
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के दौरान कई लापरवाही हमारे सामने आई. सबसे पहले घटनास्थल को पुलिस ने किसी भी तरह से बंद नहीं किया था और तमाम लोग वहां आ जा रहे थे ऐसे में इस घटना से जुड़े फोरेंसिक सबूत नष्ट होने का पूरा खतरा है. इस वारदात के बाद से लडकी की मां सदमे में हैं जिनका इलाज कराया जा रहा है.

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जांच में कई गड़बड़ियां
आयोग ने ये बात भी उठाई है कि केरल का फोरेंसिक लैब तक काम नहीं कर रहा है और लड़की की हत्या ले जुड़े सबूतों को बाहर भेजा जा रहा है, जिससे जांच काम में और देरी हो रही है. आयोग ने इस बात पर भी कड़ी आपति दर्ज की कि लड़की का पोस्टमार्टम किसी भी पेशेवर डॉक्टर ने नहीं किया. ये अपने आप में पुलिस-प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है. आयोग ने इस बारे मे शिकायत करने के लिए चुनाव आयोग से भी समय मांगा है. आयोग का यह मानना है कि इतने संवेदनशील हत्या के मामले को सुलझाने क लिए सरकार के पास समय नहीं है को केन्द्र सरकार से सहायता मांगी जा सकती थी. फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग को केरल सरकार ने ठंडे बसते में डाला दिया है.

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