शीर्ष माओवादी नेता किशनजी ने वार्ता की केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम की सशर्त पेशकश ठुकराते हुए बुधवार को कहा कि सरकार को ‘पहले हिंसा रोकनी चाहिए’.
किशनजी ने किसी अज्ञात स्थान से कहा, ‘सरकार ने हिंसा की शुरूआत की है और उसे पहले हिंसा रोकनी चाहिए और तब ही हम इस आह्वान पर जवाब देंगे’. चिदंबरम ने मंगलवार को वामपंथी उग्रवादी संगठन से इस शर्त पर बातचीत की ताजा पेशकश की थी कि वे 72 घंटों के लिए ही सही, हिंसा को रोकें.
किशनजी ने दावा किया, ‘हम सरकार और लोगों से कहना चाहते हैं कि हमें भी हिंसा पर विश्वास नहीं है, लेकिन अगर सरकार अहंकारी है और ना सिर्फ हमें बल्कि आम लोगों को भी बेदर्दी से मारती है तो हमारे पास हथियार का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है’. माओवादी नेता ने सवाल किया, ‘आखिर चिदंबरम क्यों हिंसा अपना रहे हैं और लोगों की हत्या कर रहे हैं जब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी आदिवासी इलाकों में विकास के मॉडल के पक्ष में हैं’.
किशनजी ने कहा कि माओवादियों ने वार्ता में मध्यस्थता के लिए अरून्धति राय, कबीर सुमन और डा. बी. डी. शर्मा के नाम सुझाए, लेकिन सरकार ने योजना आयोग की ओर से नियुक्त देवब्रत बंधोपाध्याय समिति की सिफारिशों के आधार पर पेशकश ठुकरा दी.
माओवादी नेता ने लालगढ़ के निकट रामगढ़ में बुधवार को सीआरपीएफ कर्मियों और सोमवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हत्याओं की जिम्मेदारी ली. उन्होंने कहा, ‘हमारे बंद का बुधवार को आखिरी दिन है और हम इसे सफल बनाने के लिए लोगों को बधाई देते हैं’.
किशनजी ने दंतेवाड़ा हत्याओं पर कहा, ‘हमें निर्दोष लोगों की मौत पर बहुत खेद है, लेकिन हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे किसी वाहन पर पुलिस के साथ सफर नहीं करें’. किशनजी ने कहा, ‘हमारा संघर्ष लोगों के साथ नहीं है, बल्कि सरकार के साथ है’. माओवादी नेता ने 26 मई से दो जून तक ‘काला सप्ताह’ मनाने का आह्वान किया. उन्होंने सरकार पर वैश्वीकरण के नाम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों देश को बेचने का आरोप लगाया.