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'सांप्रदायिकता' की काट में एक मंच पर नजर आएंगे वामदल और क्षेत्रीय पार्टियां

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय पार्टियां और वामदल सहित कई राजनीतिक दल साम्प्रदायिकता की समस्या से लड़ने के लिए अगले हफ्ते एक राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं.

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शरद यादव
शरद यादव

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय पार्टियां और वामदल सहित कई राजनीतिक दल साम्प्रदायिकता की समस्या से लड़ने के लिए अगले हफ्ते एक राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं.

जेडीयू प्रमुख शरद यादव और सीपीएम नेता सीतारात येचुरी ने बताया कि 30 अक्‍टूबर के ‘कन्‍वेंशन अगेंस्‍ट कम्युनलिज्म एंड फॉर यूनिटी ऑफ पीपुल’ में भाग लेने के लिए एआईएडीएमके, जेडीयू, एसपी, बीजेडी, एनसीपी, नगा पीपुल्स फ्रंट और आरपीआई (प्रकाश अंबेडकर) के साथ चार वाम पार्टियां एकजुट हुई हैं.

शरद यादव ने कहा, ‘सभी गैर कांग्रेस, गैर बीजेपी पार्टियों को एक साथ लाने की कोशिश है, जो महंगाई और मौजूदा सरकार के भ्रष्टाचार तथा साम्प्रदायिकता के खिलाफ हैं.’ येचुरी ने कहा कि मुख्य उद्देश्य हमारे धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक बुनियाद की सुरक्षा करना है, जो इस वक्त नाजुक स्थिति से गुजर रहा है.

येचुरी ने आरएसएस-बीजेपी पर चुनाव से पहले साम्प्रदायिक मतभेद को गहरा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती और यह हमारा प्राथमिक उद्देश्य है.

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कम से कम पांच राज्यों के मुख्यमंत्री- बिहार के नीतीश कुमार (जेडीयू), उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव (एसपी), नगालैंड के नेफ्यू रियो (नगालैंड पीपुल्स फ्रंट), सिक्किम के पवन कुमार चामलिंग (एसडीएफ) और त्रिपुरा से मानिक सरकार (सीपीएम) के बैठक में शामिल होने की संभावना है.

वहीं, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयलिता ने सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर इसमें शरीक होने में अपनी लाचारी का जिक्र किया. लेकिन कहा कि उन्होंने एआईएडीएमके के संसदीय दल के नेता एम थम्बीदुरई को इसमें शरीक होने और बैठक को संबोधित करने का कार्य सौंपा है. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी इसमें शरीक नहीं हो सकते हैं, बल्कि इसके लिए बीजेडी के एक वरिष्ठ नेता को भेज सकते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या यह मंच बाद में एक चुनावी मोर्चा का रूप लेगा, इस पर येचुरी ने कहा, ‘फिलहाल अभी यह उद्देश्य नहीं है. हमें वैकल्पिक नीतियों को लागू करने के लिए एक राजनीतिक विकल्प की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘हमें नेता नहीं नीति चाहिए.’ राजनीतिक दलों के अलावा सैकड़ों की संख्या में बुद्धिजीवी और संगठन भी साम्प्रदायिकता के खिलाफ इस सम्मेलन में भाग लेंगे. इनमें फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित यूआर अनंतमूर्ति, मशहूर नृत्यांगना मल्लिका साराभाई और प्रख्यात इतिहासकार इरफान हबीब शामिल हैं.

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