मध्यप्रदेश में बच्चियों की मृत्यु दर देश में सबसे ज्यादा है. यह 48 प्रति हजार है. जबकि देश में बच्चियों की मृत्यु दर 34 है. यहां शिशु मृत्यु दर भी सबसे ज्यादा है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में बच्चों की हालत ठीक नहीं है. एसआरएस की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में जन्म लेने वाले 1000 बच्चों में से 47 बच्चों की मृत्यु 5 साल के अंदर हो जाती है. जबकि, पूरे देश में यह दर 33 प्रति हजार है.
मध्यप्रदेश के शहरों में यह दर 32 प्रति हजार है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह है. यहां की दर 51 बच्चे प्रति हजार है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है. एसआरएस की यह रिपोर्ट 2017 के आंकड़ों पर आधारित है लेकिन मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर के मामले में कोई सुधार नहीं है. साल 2016 में भी यही दर थी. देश में सबसे कम शिशु मृत्यु दर नगालैंड की है जो कि 7 बच्चे प्रति हजार जन्म है. यहां बच्चियों की मृत्यु दर 13 है. जबकि, लड़कों की 2 प्रति हजार है.
सबसे ज्यादा शिशु मृत्यु दर वाले पांच राज्य
सबसे कम शिशु मृत्यु दर वाले पांच राज्य
2008 से 2017 तक शिशु मृत्यु दर में आई कमी
2008 में देश में शिशु मृत्यु दर 53 प्रति हजार थी. साल 2017 तक आते-आते यह घटकर 33 प्रति हजार हो गई. इन्हीं 10 सालों के दौरान ग्रामीण इलाकों में यह 58 से घटकर 37 और शहरों में 36 से कम होकर 23 हो गई है.
सबसे ज्यादा जन्म दर बिहार में
पिछले चार दशकों में देश में जन्म दर में भारी गिरावट आई है. 1971 में यह 36.9 प्रति 1000 था, जो 2017 में कम होकर 20.2 प्रति हजार हो गई. अभी बिहार में सबसे ज्यादा जन्म दर है. यहां यह 26.4 प्रति हजार है. वहीं, अंडमान-निकोबार में सबसे कम 11.4 प्रति हजार है.
सबसे ज्यादा जन्म दर वाले पांच राज्य
सबसे कम जन्म दर वाले पांच राज्य
क्या है बच्चों की मौत की बड़ी वजह
जिन राज्यों में शिशु मृत्यु दर ज्यादा है, वहां इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है प्री मैच्योर बर्थ यानी समय से पहले बच्चे का पैदा होना. दूसरा महिला को प्रसव के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी. तीसरा सबसे बड़ा कारण है संक्रमण. बड़े बच्चों में निमोनिया और दस्त रोग मृत्यु की बड़ी वजह बनते हैं. कई राज्यों में अस्पतालों की सुविधाएं भी लचर ही हैं.