महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटों की गिनती जारी है. हरियाणा में बीजेपी स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है. हालांकि, महाराष्ट्र में पार्टी को बहुमत नहीं मिलता दिख रहा है. दिन चढ़ने के साथ दिल्ली से लेकर मुंबई तक सियासी पारा तेज होने लगा है. तमाम दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
सोनिया गांधी (कांग्रेस अध्यक्ष): हम महाराष्ट्र और हरियाणा में हार स्वीकार करते हैं. हम दोनों राज्यों में सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. उम्मीद करते हैं नई सरकारें जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी.
राहुल गांधी (कांग्रेस): भाजपा को बधाई. महाराष्ट्र और हरियाणा में लोगों ने बदलाव के लिए वोट डाला. हम जनादेश को स्वीकार करते हैं. कांग्रेस लोगों का विश्वास फिर से हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करेगी.
अमित शाह (बीजेपी अध्यक्ष): हम महाराष्ट्र में सरकार बनाने जा रहे हैं, चाहे किसी भी तरह सरकार बने. मुख्यमंत्री भी हमारा होगा. सत्ता सीएम से शुरू होती है.
लालकृष्ण आडवाणी (बीजेपी के सीनियर नेता): बीजेपी और शिवसेना को मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनानी चाहिए. इन दोनों का गठबंधन टूटना नहीं चाहिए था. चुनाव परिणाम से संतुष्ट हूं. शिवसेना के साथ फिर से गठबंधन हो तो अच्छा है. गठबंधन तोड़ने का फैसला गलत था.
प्रफुल्ल पटेल (एनसीपी): महाराष्ट्र में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है लेकिन बीजेपी बहुमत के करीब है. राज्य में स्थिर और प्रगतिशील सरकार बनाने के लिए एनसीपी बीजेपी को बाहर से समर्थन देगी.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा (सीएम, हरियाणा): हम जनता के फैसले का सम्मान करते हैं. उम्मीद है कि बीजेपी हरियाणा का विकास करेगी.
शत्रुघ्न सिन्हा (बीजेपी): शिवसेना से गठबंधन टूटने का नुकसान हुआ.
नितिन गडकरी (बीजेपी): महाराष्ट्र में बीजेपी ताकतवर बनकर उभरी है. जनता ने उम्मीदों से हमपर भरोसा जताया है. राज्य में निश्चित रूप से बीजेपी की सरकार बनेगी. देश में मोदी की लहर चल रही है.
उद्धव ठाकरे (शिवसेना प्रमुख): महाराष्ट्र का विकास करने वालों का साथ देंगे. राज्य में कोई लहर नहीं थी.
प्रकाश जावड़ेकर (बीजेपी): एनसीपी के साथ गठबंधन का सवाल नहीं उठता. अपने दम पर सरकार बनाएंगे. दूसरी पार्टियों से समर्थन लेने का सवाल नहीं है. आखिरी फैसला पार्टी संसदीय बोर्ड करेगी.
स्मृति ईरानी (बीजेपी): खुद के दम पर मिली ये जीत बहुत बड़ी है. हमारे पास बिना गठबंधन के प्रचार का ज्यादा वक्त नहीं था ऐसे में इतना बड़ा जनमत बहुत बड़ी बात है.
माणिकराव ठाकरे (कांग्रेस): हम अपनी हार स्वीकार करते हैं. मैंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है.'
मनोहर जोशी (शिवसेना): महाराष्ट्र में नरेन्द्र मोदी की लहर नहीं थी. हमें बीजेपी के साथ आने की जरूरत है या नहीं, इस पर फैसला लिया जाना है. हमें ढाई साल का मुख्यमंत्री पद नहीं चाहिए.
देवेंद्र फड़नवीस (महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष): कांग्रेस-एनसीपी हमारी दुश्मन है, शिवसेना नहीं. शिवसेना के लिए हमारे लिए सभी विकल्प खुले. महाराष्ट्र में बीजेपी का ही सीएम बनेगा. जनता ने बीजेपी पर भरोसा जताया है.
संजय राउत (शिवसेना): अगर हम सीएम पद चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है. हमारी पार्टी ने भी बहुत सीटें
जीती हैं. राजनीति में सबकुछ जायज है.
राजीव प्रताप रूडी (बीजेपी): झारखंड और बिहार में भी बीजेपी की सरकार बनेगी. दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी हमारी सरकार बनेगी.
अनिल देसाई (शिवसेना): बीजेपी और शिवसेना शीर्ष की दो पार्टियां हैं. अगर उद्धव ठाकरे को बीजेपी से प्रस्ताव मिलता है तो इस पर विचार किया जाएगा.
किरीट सोमैया (बीजेपी): जनता ने मोदी के विजन को स्वीकार किया. जो बीजेपी के घोषणापत्र के साथ, वो आगे आएं.
एमजी वैद्य (आरएसएस): मोदी और अमित शाह ने भीड़ तो जुटाई लेकिन वोट नहीं जुटा सके. बीजेपी और शिवसेना को मिलकर सरकार बनानी चाहिए.
जेपी नड्डा (बीजेपी): जनता ने सुशासन पर मुहर लगाई है. आज शाम शिवसेना और एनसीपी से गठबंधन पर चर्चा होगी.
श्याम जाजू (बीजेपी): शिवसेना से गठबंधन से परहेज नहीं है.
माजिद मेमन (एनसीपी): महाराष्ट्र में पीएम नरेंद्र मोदी का मैजिक चला.
राजीव शुक्ला (कांग्रेस): सत्ता विरोधी लहर के चलते पार्टी को मिली हार, लेकिन आम चुनावों से बेहतर प्रदर्शन किया.
डी पी त्रिपाठी (एनसीपी): हमारी पार्टी विपक्ष में बैठने को तैयार है. एनसीपी बीजेपी या शिवसेना से गठजोड़ नहीं करेगी.
संजय निरुपम (कांग्रेस): हम हार को स्वीकार करते हैं. अब नई शुरुआत के साथ तैयारी होगी. कांग्रेस खत्म हो गई है यह न आज कहा जा सकता है और न कभी कहा जाएगा.
रामदास अठावले (आरपीआई): हम कोशिश करेंगे कि बीजेपी-शिवसेना साथ आएं. गठबंधन का टूटना बड़ी गलती थी. जनता चाहती है कि दोनों दल साथ आएं. एनसीपी से गठजोड़ एक गलत कदम होगा.