पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एक व्यक्ति को स्थानीय तृणमूल नेता के बारे में फेसबुक पर टिप्पणी करना भारी पड़ गया. सोशल मीडिया के प्रेम ने उसे जेल भेज दिया, वहीं कमेंट वायरल हो गया. जिले के माल निवासी रोहित पस्सी ने किसी नेता का नाम लिए बिना अपने फेसबुक पर लिखा था कि हत्या का आरोपी नेता जमानत पाने के लिए अदालत में पसीने-पसीने देखा गया.
रोहित पाशी के इस पोस्ट से आहत होकर निगम पार्षद पुलिन गोलदार ने पुलिस में इसके खिलाफ शिकायत की. पार्षद ने कहा कि रोहित का यह पोस्ट अपमानसूचक और हिंसा भड़काने वाला है. गोलदार ने कहा, 'पाशी ने मेरा नाम नहीं लिया था, लेकिन एक नेता जिसने जमानत पर हस्ताक्षर किया और बांसुरी बजाता है के बारे में लिखा. माल में और कौन दूसरा नेता है, जिसने शुक्रवार को जमानत पर हस्ताक्षर किया. जो बांसुरी बजाता है. जाहिर है यह मेरे बारे में था.'
'रास्ता रोकने के मामले में गया था कोर्ट'
गोलदार ने आगे कहा, 'मैं अदालत में इस पुराने मामले में जमानत लेने के लिए गया था, जो रास्ता रोकने से संबंधित है. लेकिन इस पोस्ट में मुझे हत्यारोपी बताया गया है.' रोहित पस्सी को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया और निजी मुचलके पर दिन में छोड़ दिया गया. पुलिस ने दावा किया कि उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था.
जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक आकाश मघारिया ने बताया कि हमने उसे गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 107 के तहत सार्वजनिक शांति भंग करने को लेकर बॉन्ड पर हस्ताक्षर करवाया.
'घर से खींचकर ले गई पुलिस'
दूसरी ओर, रोहित पस्सी ने कहा कि पुलिस उसे किसी अपराधी की तरह घर से खींचकर ले गई और घंटे भर से ज्यादा सलाखों के पीछे रखा. उन्होंने कहा कि वे नेताओं की पोल खोलते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया जो आधारहीन है.
'राज्य सरकार का तानाशाही रवैया'
गौरतलब है कि इससे पहले 2012 में जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा की गिरफ्तारी भी कुछ ऐसे ही मामले में हुई थी. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक मजाक उड़ाता हुआ कार्टून शेयर किया था, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया. महापात्रा ने रोहित पाशी की घटना के बारे में बताया कि राज्य सरकार के तानाशाही रवैये का यह एक और उदाहरण है.