नरेंद्र मोदी ने अभी प्रधानमंत्री पद की शपथ भी नहीं ली है. लेकिन राम मंदिर के निर्माण की मांग को लेकर आवाजें उठनी शुरू हो गई है. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) नेता अशोक सिंघल ने गुरुवार को कहा कि बीजेपी को सत्ता में लाना सुनिश्चित करने का एकमात्र उद्देश्य राम मंदिर निर्माण नहीं था.
सिंघल ने उद्योगपति बी. के. मोदी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, 'हमारा एक ही लक्ष्य था भारी बहुमत के साथ संसद में आना. केवल राममंदिर का निर्माण हमारा लक्ष्य नहीं था. हम चाहते थे कि इतने बहुमत से (संसद में) आएं कि राम मंदिर भी बन जाए और कोई भी मंदिर को गिराने की हिम्मत ना करे.
विहिप नेता ने दावा किया कि अल्पसंख्यक वोट बैंक का महत्व खत्म हो गया है और मुसलमानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका इस्तेमाल वोट बैंक की तरह ना हो.
उन्होंने कहा, जब देश में इतना बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, मुसलमानों को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका वोट बैंक की तरह इस्तेमाल ना हो और उन्हें ऐसा होने भी नहीं देना चाहिए. जैसे पूरा समाज देश की बेहतरी के लिए साथ आ गया है, उन्हें भी इसमें शामिल होना चाहिए और देश की समृद्धि के लिए काम करना चाहिए.
अशोक सिंघल ने कहा कि देश के लोग अब यह समझ सकते हैं कि मुस्लिम वोटों के पीछे भागना कितना महत्वपूर्ण है और मुस्लिम मतों के पीछे भागना कितना प्रांसगिक है. इसकी प्रासंगिकता अब नहीं दिख रही.
विहिप नेता ने कहा, इस देश में वोट बैंक की राजनीति नहीं होनी चाहिए, चाहे यह जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर होने वाला विभाजन हो. देश इन सबकी वजह से कमजोर होता है और अब तक ऐसा होता था जिसकी वजह से गठबंधन सरकार सत्ता में आती थी.
उन्होंने कहा, एक पार्टी का अकेले सत्ता में आना पहले संभव नहीं था क्योंकि हर कोई देश को बांटने में लगा हुआ था. मुझे लगता है कि नरेन्द्र मोदी ने देश और इसके लोगों को एकजुट किया है.
सिंघल ने साथ ही कहा कि आरक्षण का वोट बैंक से कुछ लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा, आरक्षण अस्तित्व में आया क्योंकि हमारे 15 प्रतिशत लोगों को अछूत (दलित) माना गया. मेरा मानना है कि अछूतों को आगे बढ़ने का एक मौका दिया जाना चाहिए.