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आर्मी के विकलांगता पेंशन में कटौती, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जारी किया फरमान

28-29 सितंबर की रात भारतीय सेना के एलीट कमांडो पीओके में घुसे और आतंकवादियों के कई कैंप तबाह कर दिए. ये कमांडो अपनी जान को जोखिम में डाल कर एलओसी पार गए थे.

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सैनिक से हाथ मिलाते मोदी
सैनिक से हाथ मिलाते मोदी

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पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को आगामी चुनावों में भुनाने की कोशिश में जुटी मोदी सरकार ने सैनिकों के पेंशन में कटौती कर दी है. रक्षा मंत्रालय ने सेवा के दौरान विकलांग होने वाले सैनिकों की पेंशन में 18 हजार रुपये प्रति महीने की कटौती की है. इस कटौती का फरमान सर्जिकल स्ट्राइक के अगले दिन ही जारी किया गया.

28-29 सितंबर की रात भारतीय सेना के एलीट कमांडो पीओके में घुसे और आतंकवादियों के कई कैंप तबाह कर दिए. ये कमांडो अपनी जान को जोखिम में डाल कर एलओसी पार गए थे. अगले दिन देशभर में सर्जिकल स्ट्राइक का शोर था और उरी हमले का बदला लिए जाने का जश्न. सबसे खुशी की बात यह रही कि हमारे कमांडो बिना किसी नुकसान को दुश्मन को बड़ा घाव देकर आए थे.

लेकिन अगर उस ऑपरेशन के दौरान कोई जवान बुरी तरह चोटिल हो जाता है और 100 विकलांगता की श्रेणी में आ जाता तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता और उसे मिलने वाले पेंशन को 45,200 रुपये से घटाकर 27,200 रुपये प्रति महीने कर दिया जाता. क्योंकि 30 सितंबर को ही रक्षा मंत्रालय ने विकलांगता पेंशन से जुड़ा एक फरमान जारी कर दिया.

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बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के इस ऐलान से सबसे ज्यादा नुकसान तो उन अफसरों को हुआ है जो ऐसे ऑपरेशंस में टीम लीडर होते हैं. यानी मेजर रैंक के अधिकारी. सरकार के नए ऐलान के मुताबिक 100 फीसदी विकलांगता वाले मेजर रैंक के अफसरों के पेंशन में 70 हजार रुपये प्रति महीने की कटौती की गई है. आर्मी के लिए रीढ़ माने जाने वाले जूनियर कमीशंड अफसरों पर भी इस फरमान की गाज गिरी है. इनके पेंशन में 40 हजार रुपये प्रति महीने की कटौती की गई है.

30 सितंबर की अधिसूचना से पहले तक 100 फीसदी विकलांगता वाले सैनिकों और अफसरों का पेंशन उनकी आखिरी सैलरी के हिसाब से तय होता था. इसके अलावा उन्हें पेंशन का 'सर्विस कंपोनेंट' भी मिलता था जो उनकी आखिरी सैलरी का 50 फीसदी होता था. नए नियम एक जनवरी 2016 से लागू हैं जिन्हें सरकार नए वेतन आयोग के तहत लाई है.

नए नियमों के मुताबिक, 'सर्विस कंपोनेंट' में कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन 'स्लैब सिस्टम' लागू किया गया है जो पर्सेंटेज सिस्टम की तुलना में काफी कम है. पांच साल की सर्विस के बाद एक सैनिक को 30, 400 रुपये की सैलरी मिलती है. 100 फीसदी विकलांगता के बाद अब उसे 12, 000 रुपये प्रति महीने की पेंशन मिलेगी. इसी तरह 10 साल की सर्विस के बाद एक मेजर को 98, 300 रुपये की पगार मिलती है लेकिन विकलांगता पेंशन के तहत अब उसे हर महीने मात्र 27 हजार रुपये ही मिलेंगे.

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