इस बार मानसून की बात करें तो अंडमान निकोबार में इसकी शुरुआत 18 मई को ही हो गई थी, लेकिन इसके बाद अंडमान सागर में मानसूनी हवाओं की रफ्तार धीमी रही. लिहाजा 2 जून तक मानसून की हवाएं श्रीलंका और लक्षद्वीप तक ही पहुंच पाईं. उसके बाद मानसून में ठहराव देखा गया.
आमतौर पर केरल में मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून होती है लेकिन इस बार केरल पहुंचने में मानसून को देरी हुई और 6 जून को यहां पर मानसून की हवाएं पहुंची. अभी की बात करें तो केरल के साथ साथ तमिलनाडु के कई इलाकों में मानसून ने दस्तक दे दी है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में कर्नाटक के कुछ इलाकों, पूरे केरल और पूरे तमिलनाडु के साथ साथ पूर्वोत्तर भारत में मानसून दस्तक दे देगा. आमतौर पर 5 जून तक कर्नाटक और पूर्वोत्तर भारत में मानसून दस्तक दे देता है लेकिन इस बार यहां पर मानसून के 8 जून तक पहुचने की संभावना है.
मुंबई, बिहार में 8 दिन देरी से आएगा
10 जून तक कोंकण-गोवा, मुंबई-बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बिहार में मानसून सामान्य तौर पर दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार इसमें 7 से 8 दिन की देरी संभव है. इसी तरह गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ में मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 15 जून है लेकिन इस बार इन इलाकों में जून के तीसरे हफ्ते में मानसून के पहुंचने की संभावना है. दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई तक आमतौर पर मानसून दस्तक दे देता है लेकिन इस बार इसमें भी हफ्ते भर की देरी संभव है. 15 जुलाई तक मानसून पश्चिमी राजस्थान के बचे हुए इलाकों में दस्तक देता है लेकिन इस बार यहां पर भी मानसून के बादलों के आने में देरी की संभावना है.