दुनिया में पसरा आतंकवाद अब लगता है मुस्लिम देशों में सिमट रहा है. तो जाहिर है, इन देशों में हुए आतंकी हमलों में मारे गए भी मुस्लिम ही. अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज़्म सेंटर (एनसीटीसी) ने 2006 से 2011 के बीच आतंकवाद की स्थिति पर जो रिपोर्ट तैयार की है, उसकी कुछ चौंकाने वाली हैं-
01. पांच सालों में अमेरिका और यूरोप में किसी भी आतंकी घटना में कोई मुस्लिम नहीं मारा गया. लेकिन मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में आतंकवाद की वजह से सबसे बड़ा नुकसान मुसलमानों का ही हुआ. आतंकी हमलों का शिकार होने वाले सबसे ज्यादा मुस्लिम ही हैं.
02. 2010 तक ईसाइयों पर होने वाले आंतकी हमलों में 45 फीसदी तक गिरावट आई, लेकिन मुस्लिम के शिकार होने की तादाद बढ़ती जा रही है. दुनियाभर में होने वाली आतंकी वारदातों में जान गंवाने वालों में 82 से 97 फीसदी मुस्लिम ही थे.
03. पांच साल के भीतर अफगानिस्तान में 3245, इराक में 2958, पाकिस्तान में 2038, सोमालिया में 1013 और नाइजीरिया में 590 लोगों की जान गई. मरने वाले सभी मुस्लिम थे.
04. अल-कायदा और उसके सहयोगी संगठनों ने पांच सालों में करीब 688 हमले किए. जिनमें लगभग 2,000 लोगों की मौत हुई. अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तालिबान के 800 आतंकी हमलों में लगभग 1,900 लोगों की जान गई. इनमें मारे गए 99 फीसदी लोग मुस्लिम थे.
05. आतंकवाद के मामले में दूसरा सबसे बड़ा वर्ग मार्क्सवाद से जुड़ा है. इन्हें धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक और अराजकतावादी कम्युनिस्ट विचारधारा का समर्थक माना जाता है. 2010 तक इनके 2283 के हमलों में 1926 की लोगों की मौत हुई.
अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड की ग्लोबल टेररिज़्म डाटाबेस (जीटीडी) इसकी वजह ये बताती है कि ये हमले अधिकतर हुए भी मुस्लिम देशों में. जीटीडी के मुताबिक 2004 से 2013 के बीच आधे से ज्यादा आतंकी हमले इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में हुए. जिनमें 60 फ़ीसदी लोगों की जान चली गई. हालाकि ये एजेंसी उनके कुल प्रतिशत को लेकर अपना रुख साफ नहीं करती. जीटीडी के मुताबिक दुनियाभर में होने वाले आतंकी हमलों की तुलना में अमरिका, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन में होने वाले हमलों की संख्या का औसत काफ़ी कम है. 2004 से 2013 के बीच जहां अमरीका में 131, फ्रांस में 47 और ब्रिटेन में 400 आतंकी हमले हुए, वहीं इसके उलट इराक़ में 12,000 आतंकी हमले हुए जिनमें 8000 जानलेवा हमलों का खामियाजा मुसलमानों को ही जान देकर भुगतना पड़ा.