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40 रुपये से बढ़कर 110 रुपये हो जाएगा मुंबई मेट्रो का किराया!

31 अक्टूबर के बाद मुंबई मेट्रो में यात्रा करने वाली सवारियों को अपनी जेबें अधिक ढीली करनी पड़ सकती है क्योंकि मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड ने इसके किराए में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है.

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मुंबई मेट्रो
मुंबई मेट्रो

31 अक्टूबर के बाद मुंबई मेट्रो में यात्रा करने वाली सवारियों को अपनी जेबें अधिक ढीली करनी पड़ सकती है क्योंकि मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड ने इसके किराए में बढ़ोतरी का सुझाव दिया है. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की अगुवाई वाली मुंबई मेट्रो वन (एमएमओपीएल) ने वर्तमान अधिकतम किराए 40 रुपये को बढ़ाकर 110 रुपये करने का सुझाव दिया है. जबकि न्यूनतम किराया 10 रुपये ही रखने को प्रस्तावित किया गया है.

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मुंबई मेट्रो का परिचालन कर रही एमएमओपीएल ने 31 अक्टूबर तक मौजूदा किराया 10 रुपये से 40 रुपये के बीच ही रखने का फैसला किया है. इसके बाद वो किराए के ढांचे पर विचार करेगी और सरकार से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर टिकट लागत में क्रमवार बढ़ोतरी करेगी.

किराए में बढ़ोतरी का फैसला सोमवार को एमएमओपीएल की बोर्ड की बैठक के बाद किया गया. इस मीटिंग में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएमआरडीए, राज्य और केंद्र के प्रतिनिधियों समेत कुल छह सदस्यों ने भाग लिया.

एमएमओपीएल ने कहा, ‘किराया निर्धारण समिति ने नए किराए का प्रस्ताव ऑपरेशन कीमतों के बढ़ने की वजह से प्रस्तावित किया है. इसने न्यूनतम किराया 10 रुपये जबकि अधिकतम 110 रुपये किए जाने का प्रस्वार रखा है. किराए को निर्धारित करने के लिए समिति द्वारा नियुक्ति किए गए चार विशेषज्ञों की रिपोर्ट को इसका आधार माना गया है.’

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एमएमओपीएल के मुख्य कार्यकारी अभय मिश्र ने कहा, ‘किराया निर्धारण समिति की सिफारिशों में मेट्रो लाइन के परिचालन की लागत, कारोबारी व्यावहार्यता आदि को ध्यान में रखा गया है.’ उन्होंने कहा, ‘व्यापारिक स्तर पर हमें काफी नकदी का नुकसान होगा लेकिन यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है कि फिलहाल मौजूदा किराए पर ही परिचालन जारी रखा जाए. हम किराया निर्धारण समिति की सिफारिशों पर सरकार और अन्य अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं.’

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने एक बयान में कहा है कि किराया निर्धारण समिति द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सरकार द्वारा एमएमओपीएल को मेट्रो परिचालन सब्सिडी देनी चाहिए ताकि किराए को किफायती रखा जा सके. इसके साथ ही मेट्रो परिसंपत्तियों के समुचित मौद्रिक दोहन का सुझाव भी दिया गया है.

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