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मुंबई में 93 साल पुरानी चॉल की बदलेगी सूरत, 10 हजार परिवारों को मिलेगा आशियाना

मुंबई के नाौगांव, वर्ली और एनएम जोशी मार्ग पर स्थित 3 बीडीडी चॉलों में कुल 15,593 किरायदार हैं. यहां कुल 195 चॉलें हैं. काफी वाद-विवाद और सरकार की ढीली नीति के चलते बीडीडी चॉलों का डिवेलपमेंट सालों से अधर में लटका पड़ा था. मामला कोर्ट में भी गया, जहां सरकार और संबंधित एजेंसियों को कोर्ट ने खूब फटकार लगाई.

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मुंबई की एक चाल
मुंबई की एक चाल

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मुंबई के वर्ली इलाके में 93 साल पुरानी चॉल का पुनर्विकास किया जाएगा. मुंबई हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड यानी म्हाड ने इस क्रॉन्ट्रैक्ट टाटा प्रोजेक्ट्स के कंसोर्टियम को दिया है. यह क्रॉन्ट्रैक्ट 11, 744 करोड़ रुपये का है. इसे भारत का सबसे बड़ा रिहायशी और कमर्शियल रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट माना जा रहा है. इससे यहां रहने वाले 10,000 से अधिक परिवारों को फायदा होगा.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी दस्तावेज में चॉल का नाम बॉम्बे डेवलपमेंट डिपार्टमेंट रेजिडेंशियल एंड कमर्शियल सोसायटी है. यह मुंबई में ब्रिटिश जमाने की सबसे पुरानी इमारत है.

बताते हैं कि मुंबई ने महानगर का जामा पहनना शुरू ही किया था. शहर में रोजाना सैकड़ों की तादाद में आने वाले कामकाजियों के रहने के इंतजाम के लिए मकानों का निर्माण जरूरी हो गया, तो सरकारी कर्मचारियों के ल‌िए 20वीं सदी के पूर्वार्ध में इन चॉलों का निर्माण किया बॉम्बे डिवेलपमेंट डॉयरेक्टरेट ने, जिसका गठन तत्कालीन गवर्नर सर जॉर्ज लॉयड ने 1920 में खास इसी उद्देश्य से किया था.

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लॉयड ने शहर के विकास और आवास जरूरतों के लिए‌ विशाल योजना बनाई और अमल के लिए बॉम्बे इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को देने के बजाय उसे खुद ही अमल में लाने का फैसला किया. कपड़ा मिलों की चिमनियों के लिए पहचाने जाने वाले इलाके धीरे-धीरे आबाद होने लगे.

इनमें हर धर्म और जातियों के लोग थे. ज्यादातर गरीब, निम्न मध्यम वर्ग के व दलित. इन चॉलों का कंपोजीशन देखें तो महाराष्ट्रियन के बाद आंध्र प्रदेश के लोग सबसे ज्यादा मिलेंगे. इसके बाद क्रमशः उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक के बाशिंदों का नंबर आता है.

अरसे से लटकी थी योजना

मुंबई के नाौगांव, वर्ली और एनएम जोशी मार्ग पर स्थित 3 बीडीडी चॉलों में कुल 15,593 किरायदार हैं. यहां कुल 195 चॉलें हैं. काफी वाद-विवाद और सरकार की ढीली नीति के चलते बीडीडी चॉलों का डिवेलपमेंट सालों से अधर में लटका पड़ा था. मामला कोर्ट में भी गया, जहां सरकार और संबंधित एजेंसियों को कोर्ट ने खूब फटकार लगाई.

अब लगभग सभी बाधाएं दूर हो गई हैं. अगले 10 साल में इन टूटी-फूटी चॉलों की जगह पर 22 से लेकर 67 मंजिल तक की कई आलीशान इमारतें खड़ी हो जाएंगी. यहां पर बसे लोगों को सरकार करीब 500 वर्ग फुट के फ्लैट देगी.

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बहरहाल 90 साल पुरानी इस चॉल को महाराष्ट्र सरकार ने दोबारा बनाने का फैसला किया है. नौगांव और एनएम जोशी मार्ग चाल के लिए पुनर्विकास की बिडिंग प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. नौगांव प्रोजेक्ट एमएंडडी को और एनएम जोशी प्रोजेक्ट शापूरजी पॉलोनजी को मिला है.

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