नेशनल हेराल्ड घोटाले के मामले में याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कई गवाहों और दस्तावेजों को सबूत के तौर पर अदालत में मंगाने की याचिका वापस ले ली है.
याचिका में क्या था?
स्वामी चाहते थे कि इस केस से जुड़े दस्तावेजों को अदालत में पेश करने की इजाजत दी जाए. उन्होंने मांग की थी कि मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और तीन आईएएस अफसरों संदीप सिंह ढिल्लन, विनीत गर्ग और शकुंतला जाखू के बयान दर्ज हों और उन्हें आरोपी बनाया जाए. लेकिन सोमवार को पटियाला कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्वामी ने ये याचिका वापस ले ली. अब सुनवाई की अगली तारीख 1 जुलाई मुकर्रर की गई है.
सोनिया, राहुल की बढ़ीं थीं मुश्किलें
इससे पहले मामले में कांग्रेस पार्टी को उस समय झटका लगा जब दिल्ली हाईकोर्ट ने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ इनकम टैक्स कार्यवाही पर रोक लगाने से मना कर दिया. साथ ही कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को टैक्स अधिकारियों से संपर्क करने को कहा. यंग इंडिया कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी हिस्सेदारी है.
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में लखनऊ में हुई थी. जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक बने थे. 1942 में अंग्रेजी सरकार ने इसे बंद करवा दिया. लेकिन 1946 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने अखबार की कमान अपने हाथ में ली. 1977 में कांग्रेस की करारी हार के बाद अखबार को दोबारा बंद करना पड़ा था. लेकिन राजीव गांधी ने इसे दोबारा शुरू करवाया. हालांकि इस बार अखबार के लखनऊ संस्करण पर ताला लगा दिया गया और अखबार सिर्फ दिल्ली से छपने लगा.
लेकिन 2008 तक दिल्ली एडिशन को भी बंद करने की नौबत आ गई. अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया. आरोप है कि कांग्रेस ने इस कंपनी को 90 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन दिया. इसके बावजूद अखबार को दोबारा चालू नहीं किया गया. साल 2012 में अखबार का मालिकाना हक यंग इंडिया कंपनी को ट्रांसफर किया गया. कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है. सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की 1600 करोड़ की संपत्ति को महज 50 लाख में हासिल की. घोटाले का आरोप लगाते हुए स्वामी मामले को 2012 में कोर्ट ले गए.