राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने ईसाई शैक्षणिक संस्थानों पर मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी पर कहा कि इससे समुदाय को चोट पहुंची है. जॉर्ज कुरियन ने एक खत में कहा कि मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणी से ईसाई समुदाय के सदस्यों को निराशा और पीड़ा पहुंची है.
हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि यह आम लोगों के बीच यह धारणा बन गई है कि ईसाई शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हैं. कोर्ट ने कहा था, 'स्टूडेंट्स के मां-बाप खासकर छात्राएं, सोचते हैं कि ईसाई संस्थान उनके बच्चों के लिए बेहद असुरक्षित हैं.'
कुरियन ने बताया कि कैसे याचिकाकर्ता के धर्म या आरोपी पर सुनवाई में विचार नहीं किया गया. उन्होंने देश में हो रहे धर्मांतरण की भी आलोचना की, जिसका जिक्र मद्रास हाई कोर्ट ने भी किया था. कोर्ट ने कहा कि साल 1951 से लेकर अब तक ईसाई समुदाय की 2.3 प्रतिशत जनसंख्या में कोई बदलाव नहीं आया है.
कुरियन ने कहा कि 2011 की जनगणना में भी ईसाई समुदाय की जनसंख्या इतनी ही थी. कुरियन ने खत में ईसाई शैक्षणिक संस्थानों की अहमियत और उपलब्धियों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि भारत में एजुकेशन के क्षेत्र में ईसाई समुदाय का योगदान हर कोई मानता और स्वीकारता है.
बीते दिनों कुछ छात्राओं ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के प्रोफेसर सैमुअल टेनिसन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था छात्राओं का कहना है कि मैसूर, बेंगलुरू में इस साल जनवरी में एक स्टडी टूर के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर ने उनका उत्पीड़न किया था. कॉलेज की इंटरनल कमेटी ने भी जांच के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर पर लगे आरोपों की पुष्टि की थी. जिस पर आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ लगे आरोपों को गलत बताया था.
प्रोफेसर का आरोप है कि इंटरनल कमिटी ने उन्हें वह दस्तावेज और बयान मुहैया नहीं कराए, जिससे वह अपना बचाव कर पाते. वहीं कॉलेज और कमेटी का कहना है कि आरोपों की सच्चाई परखने के लिए आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को भी बचाव के पूरे मौके दिए गए. मद्रास हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए जज ने कहा था, 'कोर्ट आंतरिक कमेटी की जांच में किसी तरह की कमी नहीं पाती है. कोर्ट का मानना है कि आंतरिक समिति की जांच के दौरान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया है.'