मुंबई के आरे के जंगलों के बाद अब ओडिशा के संभलपुर में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है. यहां भी जंगल के चारों तरफ पुलिस को तैनात कर दिया गया, इसके बाद शुरू हुई पेड़ों की कटाई. एक के बाद एक 40 हजार से ज्यादा हरे-भरे पेड़ काट डाले गए.
ओडिशा के संभलुपर जिले के तालाबिरा गांव में काटे गए. 40 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (NLC) ने की है. नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (NLC) कंपनी यहां कोयले की खदान बनाना चाहती है इसलिए उसने 40 हजार से ज्यादा पेड़ काट डाले.
जंगल के चारों तरफ तैनात 10 प्लाटून पुलिस
तालाबिरा गांव के इस जंगल के चारों तरफ 10 प्लाटून पुलिस को तैनात करवाकर NLC ने पेड़ों की कटाई की. पुलिस इसलिए तैनात की गई ताकि ग्रामीण ज्यादा विरोध न कर सकें. पुलिसबल की भारी तैनाती के बावजूद तालाबिरा गांव और आसपास के ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई रोकने का प्रयास किया. विरोध किया. यहां तक कि पुलिस वालों से हल्की झड़प भी हुई लेकिन सब बेकार चला गया.
नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (NLC) ने एक कोयला कंपनी के साथ खदान बनाने का समझौता कर रखा है. ओडिशा में झरसुगुड़ा और संभलपुर में इसे कोयले के खदान बनाने हैं. स्थानीय मीडिया के अनुसार यह भी दावा किया जा रहा है कि संभलपुर के चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के रिपोर्ट में लिखा गया है कि यहां पर 1,30,721 पेड़ काटे गए हैं.
ग्रामीणों ने किया था पेड़ काटने का विरोध
जब से पेड़ कटने शुरू हुए तब से ही तालाबिरा गांव के ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू किया. तालाबिरा ग्राम्य जंगल कमेटी ने जंगल की सुरक्षा के लिए गार्ड तक तैनात कर दिया. साथ ही कहा कि जो भी परिवार इन जंगलों की रक्षा करेगा उसे तीन किलो चावल दिया जाएगा.
जिलाधिकारी ने नहीं दिया जवाब, काट दिया फोन
जब इस बारे में इंडिया टुडे ने संभलपुर के जिलाधिकारी शुभम सक्सेना को फोन करके जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने तत्काल फोन काट दिया. कई बार प्रयास करने पर भी फोन नहीं उठाया. वन मंत्री बिक्रम केशरी अरूख से फोन पर बात करने की कोशिश भी बेकार गई. ओडिशा के प्रधान वन संरक्षक और फॉरेस्ट बल के प्रमुख डॉ. संदीप त्रिपाठी ने आजतक को बताया कि उनको इस मामले की कोई जानकारी नहीं है.
तालाबिरा से निकलता है 2 करोड़ टन कोयला
NLC तालाबिरा-2 और 3 कोल ब्लॉक्स से साल भर में 2 करोड़ टन कोयला का उत्पादन करती है. इससे संभलपुर और झरसुगुड़ा में मौजूद 4200 मेगावॉट के थर्मल पावर प्लांट चलते हैं. (इनपुट-मोहम्मद सुफियान)