scorecardresearch
 

ऑपरेशन दुर्योधन: सच दिखाने पर मिली सजा

ऑपरेशन दुर्योधन तो सभी को याद होगा. उसमें पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने वाले सांसदों का भंडाफोड़ किया गया था लेकिन कमाल देखिए कि जिन पत्रकारों ने इतने बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया, वही मुजरिम बन गये.

Advertisement
X

ऑपरेशन दुर्योधन तो सभी को याद होगा. उसमें पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने वाले सांसदों का भंडाफोड़ किया गया था लेकिन कमाल देखिए कि जिन पत्रकारों ने इतने बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया, वही मुजरिम बन गये.

अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने वाले सांसदों का खुलासा करने वाले पत्रकार अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है. ऑपरेशन दुर्योधन वो सच्चाई, जिसने देश की सबसे बडी पंचायत में बैठने वाले पंचों के काले सच को सामने ला दिया था. किस तरह पैसे लेकर सांसद संसद में सवाल उठाने को तैयार हो जाते हैं, इसका स्टिंग ऑपरेशन किया था कोबरा पोस्ट के पत्रकार अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज ने. आजतक ने अपने कार्यक्रम ऑपरेशन दुर्योधन में सांसदों के उस सच का भंडाफोड़ किया था. लेकिन पुलिस की चार्जशीट में अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज को भी अभियुक्त बना दिया गया है.

आज तक ने ऑपरेशन दुर्योधन में किया था खुलासा
पैसे लेकर सवाल पूछने वाले ग्यारह सांसदों का आजतक ने अपने प्रोग्राम ऑपरेशन दुर्योधन में खुलासा किया था. 21 दिसंबर 2005 को लोकसभा ने अपने दस और उसके अगले दिन राज्यसभा ने अपने एक सांसद की सदस्यता रद्द कर दी थी. राज्यसभा की एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने राज्यसभा के एक सांसद और बिचौलिये का काम करने वाले एक दलाल के साथ साथ इस मामले का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकारों अनिरुद्ध बहल और सुहासिनी राज के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया. बाद में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को इस बात के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगायी कि पुलिस सभी आरोपी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है.

जून 2009 में 9 पूर्व सांसदों के खिलाफ चार्जशीट फाइल
ऑपरेशन दुर्योधन के दिखाए जाने के करीब साढ़े तीन साल बाद जून 2009 में दिल्ली पुलिस ने नौ पूर्व सांसदों के खिलाफ चार्जशीट फाइल किया है, जबकि एक सांसद के खिलाफ चार्जशीट के लिए लोकसभा अध्यक्ष से इजाजत मांगी है. गौरतलब है कि संसद में बहस के दौरान ये बात साफ उभरकर आई थी कि ऑपरेशन दुर्योधन जनहित में किया गया है और संसद ने पत्रकारों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी. सवाल ये खड़ा होता है कि जनहित में सांसदों के भ्रष्टाचार को सामने लाने वाले कोबरा पोस्ट के दोनो पत्रकारों को आरोपी बनाना क्या सही है.

Advertisement
Advertisement