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राफेल खरीद से जुड़ी कैग रिपोर्ट पर विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

जहां एक तरफ राफेल विमान सौदे को लेकर कैग की रिपोर्ट को बीजेपी अपनी जीत बता रही है, तो ऐसे में कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं.

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राफेल विमान (फाइल फोटो: पीटीआई)
राफेल विमान (फाइल फोटो: पीटीआई)

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फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान हुआ सौदा पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार से सस्ता होने के साथ ही विमानों की डिलीवरी भी यूपीए से पहले होनी है. कैग की इस रिपोर्ट को जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दूसरी बड़ी जीत के तौर पर ले रही है, तो वहीं विपक्षी दलों ने इसकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए.

राफेल खरीद से जुड़ी कैग रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता और सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि कैग की रिपोर्ट भरोसे लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार की कारगुजारियों से परिचित है, हमें मालूम था कि कैग रिपोर्ट में भी लीपापोती होगी. वहीं रक्षा मामलों पर संसद की परामर्श समिति के सदस्य और कांग्रेस सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि रिपोर्ट को फौरी तौर पर देखने में ऐसा लगता है कि सौदे का सही आकलन हुआ ही नहीं.

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बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सदन के आखिरी दिन राफेल मामले पर बहु प्रतिक्षित कैग रिपोर्ट आधी अधूरी होने के साथ पूरी तरह से सही नहीं है. बीएसपी द्वारा जारी बयान में मायावती ने पूछा कि बीजेपी सरकार में क्यों संवैधानिक संस्थाएं अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं कर पा रहीं? उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार पिछले पांच साल के दौरान एक भी राफेल विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल नहीं करा पाई.

राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान के व्यक्ति विशेष के इस्तीफे के बाद से ही हम लगातार कह रहे थे कि अब देश में आंकड़े भी सुरक्षित नहीं हैं. बता दें कि पिछले दिनों सांख्यिकी आयोग के दो अधिकारियों ने बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर इस्तीफा दे दिया था. मनोज झा ने कहा कि कैग की रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि सरकार अपनी पसंद के आंकड़े तैयार करा रही है.

वहीं सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि राफेल खरीद पर कैग की रिपोर्ट के साथ-साथ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को ही संदिग्ध बता दिया. येचुरी ने कहा कि मौजूदा कैग, राफेल करार होने से पहले वित्त मंत्रालय में थे. वह स्वयं राफेल खरीद का हिस्सा थे ऐसे में वह इसका परीक्षण नहीं कर सकते.

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इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंग्रजी अखबार में राफेल सौदे से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कैग की रिपोर्ट में इस डिसेंट नोट का जिक्र नहीं है जिसमें कहा गया कि पिछली सरकार का सौदा एनडीए सरकार के मुकाबले बेहतर था. बहरहाल 16वीं लोकसभा के आखिरी दिन कैग की रिपोर्ट पेश तो हो गई. लेकिन इस रिपोर्ट पर चर्चा अब अगली लोकसभा के गठन के बाद ही संभव है.

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