बहुमत के अभाव में राज्यसभा में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्ष के विरोध का सामना कर रही सरकार संसद के एक सदन का सत्रावसान कर अध्यादेश जारी करने जैसे कई विकल्पों पर विचार कर रही है.
भूमि अधिग्रहण बिल पर रहेगी RSS की नजर
हालांकि, एक विचार यह भी है कि अध्यादेश को तब तक के लिए निष्प्रभावी होने दिया जाए जब तक विधेयक पर आम राय न बन जाए. फिलहाल सरकार उन नौ संशोधनों पर कायम है जो वह इस महीने की शुरुआत में लोकसभा में विधेयक पारित कराने के दौरान लेकर आई थी. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इन संशोधनों को कार्योत्तर मंजूरी (पोस्ट फैक्टो अप्रूवल) दे दी.
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया, 'हमने कुछ संशोधन दिए थे. कैबिनेट ने उन संशोधनों को कार्योत्तर मंजूरी दे दी है.' प्रसाद से पूछा गया था कि क्या कैबिनेट की बैठक में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर चर्चा हुई थी.
एक अन्य मंत्री पीयूष गोयल ने भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज करते हुए कहा, 'हमने कैबिनेट के सभी निर्णयों के बारे में आपको बता दिया है.' इस बीच, सरकार के सूत्रों ने कहा कि पहले ऐसी घटनाएं हुई हैं जब लंबित विधेयकों पर ऐसे समय में भी अध्यादेश जारी किए गए जब संसद का सत्र किसी न किसी तरह चल रहा था.
सरकारी सूत्रों ने कहा, 'ऐसे समय में अध्यादेश जारी किए जाने के उदाहरण हैं जब लोकसभा का सत्र चल रहा था लेकिन राज्यसभा का सत्र नहीं चल रहा था और उस विषय से जुड़ा विधेयक संसद में लंबित था.'
सूत्रों ने कहा, 'इसी तरह, ऐसे समय में भी अध्यादेश जारी करने के उदाहरण हैं जब राज्यसभा का सत्रावसान हो गया था और लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी थी, लेकिन सत्रावसान नहीं हुआ था.'
इसका मतलब यह है कि सरकार के पास चालू सत्र में किसी एक सदन के सत्र का अवसान कर फिर से अध्यादेश लाने का विकल्प है.
सूत्रों ने कहा कि ऐसे छह उदाहरण हैं जब ऐसे समय में अध्यादेश लाए गए जब एक सदन के सत्र का अवसान हो चुका था. विधेयक के भविष्य पर बरकरार रहस्य के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कैबिनेट इस पर फैसला करेगी.
इनपुट-भाषा