हैदराबाद एनकाउंटर केस में महिला डॉक्टर से बलात्कार के बाद जलाकर हत्या करने वाले चारों आरोपियों के एनकाउंटर के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है. याचिका में एनकाउंटर को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन बताते हुए केस दर्ज़ कर घटना की जांच की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट के वकील जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने पुलिस एनकाउंटर को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के ख़िलाफ़ बताया है. इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए.
याचिका में मुठभेड़ पर पुलिस टीम के मुखिया समेत सभी अफसरों पर FIR दर्ज कर जांच शुरू करने की भी मांग की गई है.
याचिकाकर्ता की मांग है कि ये जांच सीबीआई, SIT, CID या किसी अन्य निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराई जाए जो तेलंगाना राज्य के अंतर्गत ना हो. इसके साथ ही जांच टीम की अगुआई साइबराबाद के पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार से उच्च पद के अफसर से कराई जाए.
क्या है मामला?
बता दें कि पिछले हफ़्ते हैदराबाद की एक डॉक्टर युवती से सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. जिसके बाद हैदराबाद से करीब 50 किलोमीटर दूर शादनगर के पास चटनपल्ली में पुलिस से कथित तौर पर हथियार छीनने की कोशिश के बाद भाग रहे आरोपियों को शुक्रवार सुबह पुलिस ने मार गिराया.
साइबराबाद पुलिस कमिश्नर पीसी सज्जाकार के मुताबिक पुलिस वहां दुष्कर्म की रात मौका-ए-वारदात का क्राइम सीन समझने के लिए आरोपियों को लेकर गई थी.
तेलंगाना HC ने शवों को सुरक्षित रखने का दिया आदेश
इससे पहले शुक्रवार को तेलंगाना हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया और सोमवार रात 8 बजे तक शवों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.
कोर्ट एनकाउंटर के खिलाफ अर्जी पर सोमवार की सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेगा.
मुख्य न्यायाधीश अरविंद बोबडे बोले जल्दबाजी में न्याय नहीं
जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, "मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए, मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है". उन्होंने कहा कि न्याय को कभी भी बदले का रूप नहीं लेना चाहिए.
क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन?
- एनकाउंटर के बाद मामले की एफआईआर संबंधित थाने में दर्ज की जाएगी जो इलाके से संबंधित कोर्ट में भेजी जाएगी.
- मुठभेड़ की जांच राज्य की सीआईडी, दूसरे पुलिस स्टेशन या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी, जो पूरी तरह साइंटिफिक और पारदर्शी होगी. जांच अच्छी तरह दस्तावेजों पर आधारित होगी और जांच एजेंसी निर्णायक जांच रिपोर्ट तैयार करेगी.
- ये जांच कम से कम एसपी रैंक का अधिकारी करेगा.
- एनकाउंटर से पहले पुलिस टीम को किस तरह या किस जरिए से सुराग या जानकारी मिली, ये सब पुलिस डायरी में विस्तार से दर्ज करना होगा या फिर किसी डिजिटल फॉर्म में ये सब दर्ज होगा.
- अगर किसी हाई अथॉरिटी से सूचना मिली हो, तो वो भी रिपोर्ट में दर्ज होनी चाहिए.
- एनकाउंटर में जख्मी लोगों को जल्द से जल्द मेडकिल सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
- एनकाउंटर के बाद इसकी मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी. जांच रिपोर्ट इलाके के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी.
- एनकाउंटर में इस्तेमाल हथियारों को पुलिस टीम सील कर जांच के लिए फोरेंसिक और बैलेस्टिक लैब भेजेगी.
- मुठभेड़ में मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम के लिए दो डॉक्टरों की टीम होगी. मुमकिन हो तो टीम का एक सदस्य जिला अस्पताल का हेड डॉक्टर हो.
- जब तक जांच पूरी नहीं होती और रिपोर्ट नहीं आ जाती एनकाउंटर में शामिल पुलिस टीम के सदस्यों को बरी से पहले तरक्की नहीं दी जाएगी.