प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह ऐसी राजनीति में विश्वास नहीं रखते जो लोगों को मजहब के आधार पर बांटती है और न ही वह कभी सांप्रदायिक भाषा बोलेंगे. उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की राजनीति देश की पहले ही बहुत नुकसान पहुंचा चुकी है.
शब-ए-बारात के मौके पर उनसे मिलने आए मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में मोदी ने कहा, 'बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की सियासत देश का पहले ही बहुत नुकसान कर चुकी है. मैं ऐसी सियासत में यकीन नहीं रखता जो लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटती है और न ही मैं कभी सांप्रदायिक भाषा बोलूंगा.'
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने कहा कि रोजगार और विकास सब समस्याओं का समाधान है और वह ऐसा करने पर अपना ध्यान लगाए हुए हैं. 30 सदस्यीय मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि शब-ए-बारात के व्यस्त मौके पर उनका उनसे मुलाकात करने आना बहुत सराहनीय है. इमाम उमर अहमद इल्यासी की अगुवाई में उनसे मिलने आए प्रनिधिमंडल ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने वोट बैंक की विधवंसक राजनीति को नामंजूर कर दिया है और वह विकास में दिलचस्पी रखता है.
Delegation of Leaders from the Muslim Community calling on PM Shri @narendramodi
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— PIB India (@PIB_India) June 2, 2015
इस प्रतिनिधिमंडल ने मोदी से ऐसे समय में मुलाकात की है, जब हाल ही में हरियाणा के बल्लभगढ़ में हाल में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. प्रधानमंत्री ने मुलाकात के दौरान केंद्र सरकार की ओर से स्किल डेवलपमेंट के लिए की गई पहलों के बारे में और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके द्वारा लड़कियों की शिक्षा और पतंग उद्योग के क्षेत्रों में किए गए कामों की भी चर्चा की. मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री को उस नजरिये के लिए बधाई दी, जिसमें वह कहते हैं कि मुस्लिम युवकों को एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर रखना चाहिए.इस मौके पर केंद्रीय अल्पसंख्यक राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद थे. मोदी से मिलने आए मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इल्यासी, कौमी मजलिस-ए-शूरा के अध्यक्ष डा ख्वाजा इफ्तेखार अहमद, इस्लामिक काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष कारी मोहम्मद मियां मजहरी, मौलाना बिलाल अहमद, मौलाना मुहम्मद यूनुस, मौलाना मुहम्मद हारून, मौलाना नसीरूद्दीन, मौलाना मुहम्मद इकराम, मौलाना बुरहान अहमद कासमी, मौलाना अल्लामा जफर जनकपुरी, मौलाना अयूब अली, मौलाना जाकिर हुसैन, मौलाना अब्दुल मजीद, मौलाना कारी अब्दुल लतीफ, मौलाना इल्यास भरतपुरी, मौलाना लुकमान तारापुरी, डा असगर अली खान, डा असलम परवेज अहमद, प्रोफेसर काजी ओबैद उर रहमान आदि शामिल हैं.