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मोदी बोले- 5 अक्षर के 'प्रधानमंत्री' शब्द से ज्यादा ताकतवर है 4 अक्षर का 'कार्यकर्ता' शब्द

लोकसभा चुनाव में जी जान लगाने वाले बीजेपी कर्मचारियों के लिए अच्छे दिन आ गए हैं. बंपर जीत की खुशी में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उन्हें तीन-तीन महीने का बोनस मिला.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

लोकसभा चुनाव में जी जान लगाने वाले बीजेपी कर्मचारियों के लिए अच्छे दिन आ गए हैं. बंपर जीत की खुशी में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उन्हें तीन-तीन महीने का बोनस मिला. पीएम बनने के बाद पहली बार पार्टी मुख्यालय पहुंचे मोदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से पहले मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं. प्रधानमंत्री पांच अक्षर वाला शब्द है जबकि कार्यकर्ता चार अक्षरों वाला. लेकिन 'प्रधानमंत्री' शब्द से ज्यादा ताकतवर 'कार्यकर्ता' शब्द है. कार्यकर्ताओं की मेहनत के चलते ही मैं प्रधानमंत्री बना. मैं कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूं.'

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अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने पू्र्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से की. उन्होंने कहा, 'जब अटलजी प्रधानमंत्री बने थे तो मैंने उनसे कहा था वो पार्टी मुख्यालय आएं. बीजेपी का प्रधानमंत्री पहली बार अपने पार्टी मुख्यालय आएगा. तब मैंने अटलजी के लिए कुर्सियां लगाई थीं.'

बीजेपी मुख्यालय में आयोजित 'स्नेह मिलन' कार्यक्रम में मोदी ने कहा, 'आप (कार्यकर्ता) जो मुझे सम्मान दे रहे हैं, उसकी मैं कल्पना नहीं कर सकता. नई जिम्मेदारियां भले ही आएं लेकिन अगर इंसान जड़ से जुड़ा रहता है तो नई ऊर्जा आ जाती है. बीजेपी ऑफिस हम सबके लिए प्रेरणा तीर्थ है.'

मोदी ने कार्यकर्ताओं की मेहनत की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, 'मैं दफ्तर में गुजारे दिन नहीं भूल सकता. हमारी मेहनत में कोई कमी नहीं होनी चाहिए. हमें जो भी दायित्व मिलता है उसे पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिेए. लोकतंत्र में जनता का विश्वास टूटना नहीं चाहिए. पहले भी जनता ने विश्वास दिखाया है लेकिन उसे हमेशा निराशा मिली.'

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2014 के ऐतिहासिक चुनावों को लेकर उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र हमारे देश के डीएनए में है. इस बार के चुनाव अभियान पर अध्ययन होने चाहिए. इस बार नई आशा के लिए लोगों ने नई सरकार चुनी. 2014 के चुनाव 21वीं सदी को बदल देंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत के लोकतंत्र और चुनाव का पूरे विश्व पर असर पड़ता है. हम इसकी ताकत का अहसास पूरे विश्व को कराएंगे. आम जनता की उम्मीदों के लिए काम होना चाहिए. जनता का भरोसा नहीं टूटना चाहिए. सार्क देशों को शपथ ग्रहण में बुलाना बहुत बड़ा काम था.

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