प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर से देश भर में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया और कहा कि वह स्वयं सड़क पर झाड़ू लेकर निकलेंगे. मंगलवार को बेंगलुरु में सड़कों की सफाई पर बात करते-करते वह राजनीतिक टिप्पणी करने से भी नहीं चूके और कानून के जंगलों और देश से कांग्रेस की सफाई की बात भी कह डाली.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं देशवासियों से भिक्षा मांगने निकला हूं. मैं भिक्षा में हर व्यक्ति से 100 घंटे मांगता हूं. मैं स्वयं झाड़ू लगाने के लिए निकलूंगा.’
'न गंदगी करूंगा न गंदगी करने दूंगा'
'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' के बाद प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु में नया नारा दिया, ‘न गंदगी करूंगा न गंदगी करने दूंगा.’ प्रधानमंत्री ने कहा, भारत मां की सेवा करने के लिए हर किसी को सीमा पर जाकर दुश्मन की गोलियां झेलने की जरूरत नहीं है. गंदगी से मुक्ति दिलाना भी भारत मां की सेवा है, देश भक्ति है. पीएम ने कहा, ‘महात्मा गांधी ने हमें गुलामी से मुक्ति से दिलाई, हम भारत मां को गंदगी से मुक्ति दिलाएंगे. ये काम हमारा है, हम सबका काम है. इसकी शुरुआत यहीं से होगी.’ मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हमारे घर में मेहमान आने वाले होते हैं तो सबसे पहले हम घर की सफाई करते हैं. उन्होंने कहा, भारत में समृद्धि रूपी मेहमान को लाना है तो पूरे हिन्दुस्तान साफ-सुथरा करना होगा.
उन्होंने कहा, 'सफाई का काम न तो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री कर सकते हैं. सफाई और स्वच्छता का काम हमें स्वयं करना होगा. जब हम दुनिया के देशों की सफाई देखते हैं. सड़क, बगीचे और रास्ते साफ सुथरे देखते हैं तो उनकी तारीफ करते हैं. अगर हम तय करें कि मैं गंदगी नहीं करूंगा, मैं कूड़ा-कचरा बाहर नहीं फेंकूंगा, अगर हम तय करें कि हम गंदा नहीं करेंगे तो कोई हमारे देश को गंदा नहीं कर सकता.'
'पहले जनता ने सफाई की अब हम कर रहे हैं'
कांग्रेस की हार पर चुटकी लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जनता ने सफाई की अब हम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘देश में कानूनों का जंगल बन गया, इतने सारे कानून बने हुए हैं, जिनकी आज प्रासंगिकता और उपयोगिता ही नहीं है. अगर सरकार तेज चलानी है, सरकार को सीधे रास्ते पर दौड़ाना है तो कानूनों के जंगल को भी साफ करने की जरूरत है. ढेर सारे कानून साफ करने की जरूरत है. पहले की सरकारों को कानून बनाने में आनंद आता था. मैंने ठान लिया है सारे गैरजरूरी कानूनों को खत्म कर दूंगा. इसके लिए एक कमेटी बनाई है.'
'बैंकों के राष्ट्रीयकरण का असली फायदा अब मिलेगा'
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत में जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था तब पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा था कि बैंक गरीबों के लिए होने चाहिए और बैंक का पैसा गरीबों के काम आना चाहिए. बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुए 30-40 साल हो गए, लेकिन बैंक गरीबों के काम नहीं आए.’
उन्होंने कहा, ‘क्या ये खजाना, ये बैंक सिर्फ अमीरों के लिए हैं, सिर्फ उद्योगपतियों के लिए हैं. गरीबों की इन्हीं मजबूरियों और बैंक से दूरी को ध्यान में रखकर हमने ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ बनाई है. देश के आधे लोग बैंक की मुख्य धारा में ही नहीं थे. बैंकों का शुक्रिया कि उन्होंने मेरे एक आह्वान पर इतने बड़े काम में इतनी जल्दी सहयोग दिया. अब गरीबों को साहूकार के पास कर्ज के लिए नहीं जाना पड़ेगा.’
‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ से जुटे 1500 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ के तहत 4 करोड़ लोगों के बैंक अकाउंट खोले गए हैं. उन्होंने कहा, हालांकि बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस पर खुल रहे हैं, लेकिन देश के गरीब भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हैं इसलिए इस योजना के तहत भी 1500 करोड़ रुपये के बैंक अकाउंट खुले हैं. उन्होंने कहा, ‘एक गरीब की आकस्मिक मौत हो जाती है तो हर अकाउंट धारक को 1 लाख रुपये का अकस्मात बीमा मिल गया, वो इसका हकदार बन गया है. गरीब से गरीब माता-पिता भी बेटी के लिए पाई-पाई जोड़ते हैं, लेकिन इस बीच घर में कोई बीमार हो जाए तो वो पैसा डॉक्टर के घर चला जाता है. गरीब अकेला बीमार नहीं होता, उसका पूरा परिवार बीमार हो जाता है. गरीब की 30000 रुपये तक की बीमारी का खर्चा सरकार देगी.’
'बुजुर्ग और युवाओं के लिए भी योजना'
मोदी ने कहा, अब किसी भी सरकारी रिटायर कर्मचारी की पेंशन 1 हजार रुपये से कम नहीं होगी, जबकि पहले 50-100 रुपये भी पेंशन मिलती थी. उन्होंने देश के नौजवानों की बात करते हुए कहा, 'एक बार देश के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, तो भारत भी तेज गति से भागने लगेगा. भारत भाग्यशाली है कि उसकी 65 फीसदी जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है. नौजवान को हुनर मिलने जी जरूरत हे, स्किल डेवलपमेंट की बात होनी चाहिए, डिग्री से कुछ नहीं होता. सारी दुनिया को वर्कफोर्स की जरूरत है, लेकिन उसमें हुनर होना चाहिए.'
रेलमंत्री भी लगाएंगे झाड़ू
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा बनने के लिए कमर कसते हुए रेलवे ने देश भर में दो अक्टूबर को विशेष रूप से नामित कर्मचारियों द्वारा साफ सफाई को अंजाम देने के लिए 119 स्टेशनों की पहचान की है .
रेल मंत्री सदानंद गौड़ा खुद झाडू लगाकर इस व्यापक सफाई अभियान की अगुवाई करेंगे जबकि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरूणेन्द्र कुमार सहित बोर्ड के सभी सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी देशभर में विभिन्न स्टेशनों पर गांधी जयंती के दिन इस स्वच्छता अभियान में ‘श्रमदान’ करेंगे .
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस स्वच्छता अभियान की शुरूआत सुबह आठ बजे के करीब होगी और इसे रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, रेल पटरियों, रेल कार्यालय एवं वर्कशाप तथा रेल कालनियों में चलाया जायेगा, जिसमें रेल के अधिकारी एवं कर्मचारी हिस्सा लेंगे .