महंगाई पर काबू पाने के लिए मोदी सरकार ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक बैठक ली, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण मंत्री राम विलास पासवान और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह मौजूद थे.
इसके अलावा जल संसाधन और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती और रसायन-उर्वरक मंत्री अनंत कुमार भी बैठक में शामिल थे. प्रधानमंत्री ने उर्वरक और भोजन उपलब्धता पर संबंधित मंत्रालयों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.
मंत्रालयों के राज्य मंत्री और सचिव भी इस बैठक में मौजूद रहे. बैठक में मंत्रालयों की ओर से पीएम को प्रजेंटेशन दी गई.
वित्त मंत्री ने किया था जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई का वादा
इससे पहले मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया था कि 22 चीजों पर कीमतों पर सरकार की पैनी नजर है और वादा किया था कि जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
मंगलवार को हुई बैठक के बाद वित्त मंत्री ने कहा था कि बैठक में बढ़ती कीमतों से निपटने की योजना बनाई गई. 4-5 चीजों के दामों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकारों को जमाखोरों पर काबू पाने के लिए कहा गया है. फल और सब्जियों को एपीएमसी की लिस्ट से बाहर किया जा रहा है ताकि किसान सीधे बाजार में उन्हें बेच सकें. दिल्ली इस बारे में आज आदेश जारी कर सकता है.
प्याज का MEP तय, रुकेगा निर्यात!
वित्त मंत्री ने बताया कि प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय (एमईपी) कर दिया गया और आलू का बहुत जल्द तय किया जाएगा. एमईपी वह दर होती है जिसके नीचे निर्यात की अनुमति नहीं होती है. इस नीति को फिर से लागू किया गया है जबकि सिर्फ तीन महीने पहले मार्च में पिछली सरकार ने इसे खत्म किया था.
वाणिज्य मंत्री ने एक अधिसूचना में कहा कि प्याज की हर किस्म के निर्यात पर 300 डालर प्रति दिन का एमईपी लागू होगा. उन्होंने बताया कि बाजार में चावल की मात्रा बढ़ाई जाएगी. अगर राज्यों में कमी पड़ी तो खाने का तेल आयात किया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा कि कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है पर सरकार सुरक्षात्मक उपाय अपना रही है.