नरेंद्र मोदी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का रहस्यमय तरीके से लापता होना और इससे संबंधित मामलों में करीब 39 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है. हालांकि बीजेपी के विपक्ष में रहते वरिष्ठ नेताओं ने ही इन्हें सार्वजनिक करने की मांग की थी.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाल ही में एक आरटीआई अर्जी के जवाब में स्वीकार किया है कि बोस से जुड़ी 41 फाइलें हैं जिनमें से दो गोपनीय की सूची में नहीं हैं. हालांकि पीएमओ ने पिछली यूपीए सरकार के दौरान भी इसे देने से मना कर दिया. आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल को दिए जवाब में पीएमओ ने कहा, ‘इन फाइलों में दर्ज दस्तावेजों के खुलासे से दूसरे देशों के साथ रिश्तों पर बुरा असर पड़ सकता है. इन फाइलों को सूचना के अधिकार कानून की धारा 8 (1) के साथ धारा 8 (2) के तहत सार्वजनिक किये जाने से छूट मिली है.'
कटक में राजनाथ सिंह ने की थी मांग
22 जनवरी को कटक में नेताजी की 117वीं जयंती पर तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मांग की थी की तत्कालीन यूपीए सरकार नेताजी से जुड़े रिकॉर्ड को
सार्वजनिक करे. एक किताब का विमोचन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘पूरा देश यह जानने को उत्सुक है कि नेताजी का निधन कैसे हुआ और किन परिस्थितियों
में हुआ.’ कटक नेताजी का जन्मस्थान है.
- इनपुट भाषा से