लोकसभा चुनाव में करारी हार का मंथन करते हुए माकपा महासचिव करात ने माना कि वाम दलों ने नरेंद्र मोदी के कैम्पेन को कम आंका खासकर पश्चिम बंगाल में. उन्होंने कहा उदारीकरण के प्रभावों और उदारीकरण के बाद की पीढ़ी की उम्मीदों को भी हम पूरी तरह नहीं समझ सके.
माकपा के शीर्ष नेतृत्व ने चुनावों में खराब प्रदर्शन और जनाधार में कमी आने की जिम्मेदारी स्वीकार की लेकिन उसके नेतृत्व में कोई भी बदलाव अगले वर्ष पार्टी कांग्रेस (बैठक) में ही होगा. माकपा महासचिव प्रकाश करात ने सोमवार को 89 सदस्यीय केन्द्रीय समिति की दोदिवसीय बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘पोलितब्यूरो और केन्द्रीय नेतृत्व ने चुनावी परिणामों में दिखी पार्टी जनाधार में कमी और अकेले दम पर मजबूती बढ़ाने में नाकामी की प्राथमिक जिम्मेदारी ली.’
यह पूछे जाने पर कि क्या किसी नेता ने इस्तीफा देने का प्रस्ताव दिया या वरिष्ठ सदस्यों द्वारा किसी को पद से हटाने की बात हुई. उन्होंने कहा, ‘न तो पोलितब्यूरो में और ना ही केन्द्रीय समिति (सीसी) में कोई इस्तीफा देना चाहता है. कम्युनिस्ट पार्टी में कोई भी चुनावी परिणामों के कारण इस्तीफा नहीं देता है.’ करात ने इन सवालों के जवाब में कहा कि हम राजनीतिक-सांगठनिक रुख, पार्टी और अपना जनाधार बढ़ाने में नाकाम रहने की जिम्मेदारी लेते हैं.
हम ऐसा करने में नाकाम रहे. इससे पहले खबरों में कहा गया था कि सीताराम येचुरी और पश्चिम बंगाल के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण पोलितब्यूरो से इस्तीफे की पेशकश की थी. इसके अलावा, माकपा के पूर्व दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी ने पार्टी नेतृत्व पर जनता से संपर्क खोने का आरोप लगाते हुए नेतृत्व में तुरंत बदलाव की मांग की थी.