मुंबई पर आतंकवादी हमले की सात माह की सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष ने विशेष अदालत में 610 गवाहों के परीक्षण के साथ बुधवार को अपनी गवाहियां और जिरह पूरी कर ली. उधर हमले में एकमात्र जीवित गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी हमलावर अजमल कसाब ने अपने वकील की बात खारिज करते हुए कहा कि वह अपने खिलाफ पेश साक्ष्यों पर अपना पक्ष रखने के लिए फिट है.
इस बीच विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों पर कसाब को अपना पक्ष पेश करने के लिए 18 दिसंबर की तारीख तय की. अभियोजन पक्ष ने कसाब और उसके दो भारतीय सह अभियुक्त फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के खिलाफ सबूतों और कुल 610 गवाहों के परीक्षण का काम पूरा कर लिया. अभियोजन पक्ष ने कहा कि वह मुंबई हमलों में संदिग्ध लश्कर ए तैयबा कारिंदा डेविड हेडली और तहव्वुर राणा की संलिप्तता के सिलसिले में साक्ष्य एकत्रित करने के लिए इस अदालत से अमेरिकी अदालत के नाम एक आग्रह पत्र जारी करने का आग्रह करेगा.
विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कहा, ‘‘हम अपनी गवाहियां और जिरह पूरा कर रहे हैं और हेडली तथा राना के खिलाफ साक्ष्य जमा करने के लिए आग्रह पत्र का अनुरोध कर सकते हैं.’’ निकम ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि लश्कर ए तैयबा ने 26 नवंबर को मुंबई पर हमला संचालित करने के लिए लक्ष्यों के बारे में सूचना इकट्ठा करने के लिए अलग-अलग इकाइयों का उपयोग किया. उन्होंने कहा कि एक इकाई को लक्ष्यों का नक्शा तैयार करने का काम सौंपा गया जबकि दूसरे को उन जगहों की फिल्म तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. अदालत अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों और गवाहों पर 18 दिसंबर को भारतीय दंड संहिता की धारा 313 के तहत कसाब का बयान दर्ज करेगी.
बहरहाल, कसाब के वकील के. पी. पवार ने दलील दी कि सुनवाई आगे तभी बढ़नी चाहिए जब कसाब चिकित्सीय रूप से फिट हो. विशेष न्यायाधीश एम. एल. टाहिलियानी ने इसपर कसाब से पूछा कि क्या वह बीमार है. इसपर पाकिस्तानी हमलावर ने नहीं में जवाब दिया और कहा कि वह अपना बयान देने के लिए फिट है. विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कहा, ‘‘सुनवाई 8 मई को शुरू हुई और करीब सात माह में अभियोजक पक्ष ने गवाहियां और जिरह मुकम्मल कर दी.’’ निकम ने कहा कि अभियोजन पक्ष का उद्देश्य केवल कसाब के खिलाफ मामला सिद्ध करना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के प्रमुख षडयंत्रकर्ताओं का पर्दाफाश करना भी है.{mospagebreak}
उन्होंने कहा, ‘‘कसाब आतंकवादी संगठन का एक उपकरण है. वह और मारे गए 9 अन्य आतंकवादी लश्कर ए तैयबा का एक छोटा हिस्सा थे जो भारत की वाणिज्यिक राजधानी पर हमला कर भारत को गंभीर क्षति पहुंचाना चाहता था.’’ निकम ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने मुंबई पर हमला करने वाले आतंकवादियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं के बीच टेलीफोन वार्ता के मजमून के रूप में हमले से पाकिस्तान के रिश्तों का ठोस सबूत पेश किया है. उल्लेखनीय है कि मुंबई हमलों की सुनवाई करने के लिए गठित विशेष अदालत ने सुनवाई की शुरुआत में फरार 25 आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे. इनमें लश्कर ए तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद और आतंकवादी संगठन का संचालन प्रमुख जकीउर रहमान लखवी भी शामिल हैं. इन वारंट को तामील के लिए इंटरपोल को भी भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.
अभियोजन पक्ष के सबूतों में मजिस्ट्रेट के सामने कसाब का बयान भी शामिल है. इस बयान में उसने रहस्योद्घाटन किया था कि उसे और मुंबई हमले में उसके साथ रहे अन्य हमलावरों को पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा शिविर में प्रशिक्षण दिया गया था. अभियोजन पक्ष ने 610 गवाहों में से 267 की गवाहियों का परीक्षण व्यक्तिगत स्तर पर किया. इनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अपराध विज्ञान विशेषज्ञ, चश्मदीद गवाह और एफबीआई अधिकारी शामिल हैं. बाकी औपचारिक गवाहों की गवाहियां हलफनामों के रूप में अदालत के समक्ष पेश की गईं. इन गवाहों की गवाहियों का परीक्षण व्यक्तिगत स्तर पर नहीं किया गया क्योंकि ये औपचारिक प्रकृति की हैं और इनमें वे शामिल हैं जो आतंकवादियों के हाथों मारे गए लोगों के शव अस्पताल ले गए. इनमें मृतकों के रिश्तेदार शामिल हैं जिन्होंने शव का दावा किया. इनमें हमले में संपत्ति की क्षति का शिकार होने वाले लोग और घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टर शामिल हैं.