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PSE: पश्चिम बंगाल में ममता लोकप्रिय, लेकिन PM पद के लिए मोदी पहली पसंद

इंडिया टुडे के लिए कराए गए पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के ताजा सर्वे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के लिए 28% वोटर TMC और 14%  वोटर BJP को मानते हैं दोषी. अधिकतर वोटरों की राय में पश्चिम बंगाल में भी असम की तरह होना चाहिए NRC. ममता सरकार के कामकाज से 46% संतुष्ट, 22% असंतुष्ट. प्रधानमंत्री के लिए बंगाल में मोदी सबसे पंसदीदा,  दूसरे नंबर के लिए ममता से पिछड़े राहुल.

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प्रधानमंत्री के लिए बंगाल में मोदी सबसे पंसदीदा, दूसरे नंबर के लिए ममता से पिछड़े राहुल
प्रधानमंत्री के लिए बंगाल में मोदी सबसे पंसदीदा, दूसरे नंबर के लिए ममता से पिछड़े राहुल

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पश्चिम बंगाल में लगातार राजनीतिक हिंसा के लिए अधिकतर वोटर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को दोषी मानते हैं, साथ ही ममता बनर्जी सरकार की ओर से बीजेपी की रथयात्रा पर रोक लगाने के फैसले को ‘सही नहीं’ मानने वाले वोटरों की संख्या ज़्यादा है. ये निष्कर्ष एक्सिस माई इंडिया की ओर से इंडिया टुडे के लिए कराए गए पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के ताजा सर्वे से सामने आए हैं. हालांकि मुख्यमंत्री के लिए ममता बनर्जी लोकप्रियता के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे हैं. PSE सर्वे के मुताबिक ममता बनर्जी सरकार के कामकाज से 46% वोटर संतुष्ट हैं और 22% असंतुष्ट. सर्वे से सामने आया कि प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र मोदी को पहली पसंद बताने वाले वोटरों की संख्या पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक है. दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पिछड़े हुए हैं.

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बीजेपी की रथ यात्रा पर रोक का फ़ैसला 46% की राय में सही नहीं

पिछले कुछ महीनों से पश्चिम बंगाल टीएमसी और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पश्चिम बंगाल में पार्टी का आधार बढ़ाने के लिए लगातार राज्य के दौरे कर रहे हैं. वहीं ममता बनर्जी की कोशिश देशभर के विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाकर 2019 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती पेश करने की है.

बीजेपी की रथयात्रा को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से रोकने के फैसले को PSE सर्वे में 46% वोटरों ने सही नहीं माना. सिर्फ 26% प्रतिभागियों ने ही इस फैसले को सही बताया. PSE सर्वे में 28% वोटर इस सवाल पर कोई साफ़ राय नहीं जता सके.

दोनों पार्टियों के बीच रस्साकशी के साथ ही पश्चिम बंगाल से लगातार राजनीतिक हिंसा की ख़बरें आती रही हैं. PSE सर्वे के मुताबिक राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा के लिए PSE सर्वे में 28% प्रतिभागियों ने सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी को दोषी ठहराया. वहीं 14% वोटरों ने राजनीतिक हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार माना. लेफ्ट को दोषी ठहराने वाले सिर्फ 1% प्रतिभागी ही रहे. 17% वोटरों ने इसके लिए दूसरे कारण गिनाए. 40%  वोटर इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं व्यक्त कर सके.   

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48% वोटर चाहते हैं बंगाल में असम की तरह NRC

क्या असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) होना चाहिए, इस सवाल के जवाब में PSE सर्वे में 48%  वोटरों ने ‘हां’ में जवाब दिया. वहीं 30% प्रतिभागियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नागरिकों के लिए ऐसा रजिस्टर नहीं होना चाहिए.

ममता सरकार के कामकाज से 46% वोटर संतुष्ट

जनवरी में हुए ताजा PSE सर्वे में ममता बनर्जी सरकार के कामकाज से 46% वोटरों ने खुद को संतुष्ट बताया. अक्टूबर 2018 में हुए सर्वे में ये आंकड़ा 43% था. ताजा सर्वे में राज्य सरकार के कामकाज से 22% वोटरों ने खुद को असंतुष्ट बताया. तीन महीने पहले ममता बनर्जी सरकार के कामकाज से 30% वोटर खुद को असंतुष्ट बता रहे थे.

मोदी सरकार के कामकाज से 55% वोटर संतुष्ट

जहां तक केंद्र में बीजेपी सरकार के कामकाज का सवाल है तो PSE सर्वे में 55% वोटरों ने खुद को संतुष्ट बताया. बीते साल अक्टूबर में हुए  PSE सर्वे में ये आंकड़ा 51% था. केंद्र में मोदी सरकार के कामकाज से PSE सर्वे में 23% प्रतिभागियों ने खुद को असंतुष्ट बताया. तीन महीने पहले हुए सर्वे में मोदी सरकार के कामकाज से खुद को असंतुष्ट बताने वाले प्रतिभागी 25% थे.

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पीएम के लिए मोदी 49% वोटरों की पसंद, ममता से पिछड़े राहुल

ताजा PSE सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री के लिए पसंद के मामले में नरेंद्र मोदी सबसे आगे है. पश्चिम बंगाल के लिए ताजा PSE सर्वे में 49% प्रतिभागियों ने नरेंद्र मोदी को पीएम के लिए पहली पसंद बताया. अक्टूबर में हुए PSE सर्वे में 46% वोटरों ने मोदी को पीएम के लिए पहली पसंद बताया था. PSE से एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि इस राज्य में प्रधानमंत्री की पसंद के लिए मोदी के निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं बल्कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं. सर्वे में 25% वोटरों ने ममता को प्रधानमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया. तीन महीने पहले अक्टूबर में हुए PSE में ये आंकड़ा 21% था. जहां तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सवाल है तो पश्चिम बंगाल में उनकी लोकप्रियता में बीते तीन महीने में 5% की गिरावट आई है. ताजा सर्वे में उन्हें 15% वोटरों ने ही प्रधानमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया. अक्टूबर PSE सर्वे में ये आंकड़ा 20% था.   

सीएम के लिए ममता प्रतिद्वन्द्वियों से कहीं आगे

एक्सिस माई इंडिया की ओर से इंडिया टुडे के लिए इकट्ठा किए गए PSE डेटा के मुताबिक ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के लिए 54% वोटरों की पसंद हैं. बीते तीन महीने में उनकी लोकप्रियता में 1% की बढ़ोतरी हुई है. अक्टूबर PSE सर्वे में 53% वोटरों ने ममता को सीएम के लिए पहली पसंद बताया था. ताजा सर्वे में पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष को 14% वोटरों ने मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बताया. तीन महीने पहले घोष के समर्थन में राय व्यक्त करने वाले 12% वोटर थे. ताजा सर्वे में केंद्रीय मंत्री और प्रसिद्ध गायक बाबुल सुप्रियो को 6% और टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए मुकुल रॉय को 4% प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बताया.  

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रोजगार के अवसर सबसे अहम मुद्दा

अगले लोकसभा चुनाव में कौन सा मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण रहेगा?  PSE  सर्वे में इस सवाल के जवाब में 30% प्रतिभागियों ने रोजगार के अवसर को सबसे अहम मुद्दा बताया. 26% वोटरों की राय में पीने का पानी और 18% की राय में कृषि-किसानों से जुड़ी समस्याओं महत्वपूर्ण मुद्दे रहे. वहीं 16% प्रतिभागियों ने महंगाई के मुद्दे को सबसे अहम बताया.

किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलने के सवाल पर PSE सर्वे में 55% प्रतिभागियों का मानना रहा कि किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा. सिर्फ 30% वोटरों ने ही कहा, किसानों को उनके उत्पादों के वाज़िब दाम मिल रहे हैं.

राफेल (लड़ाकू विमान) डील के बारे में पूछे जाने पर 23% प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में पता है. वहीं 60 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

जिन्होंने राफेल डील के बारे में सुन रखा है उनमें से 30% वोटरों की राय में राफेल डील में भ्रष्टाचार हुआ है. वहीं 32% मानते हैं कि डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ. सर्वे में 38% प्रतिभागियों ने कहा कि वो इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकते.

एक्सिस माई इंडिया की ओर से PSE सर्वे 20 से 29 जनवरी 2019 के बीच किया गया. इस दौरान पश्चिम बंगाल के सभी 42 संसदीय क्षेत्रों में टेलीफोन इंटरव्यू लिए गए. इसमें 4,620 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

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