पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में सजायाफ्ता बलवंत सिंह राजोआना गुरुनानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर पटियाला जेल से रिहा हो सकता है. पंजाब सरकार ने राजोआना समेत 8 कैदियों को इंसानियत के आधार पर जेल से रिहा करने की मांग की थी. इस मांग को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मान लिया है. माना जा रहा है कि मंगलवार शाम यानी आज या बुधवार तक बलवंत सिंह राजोआना को पटियाला जेल से रिहा किया जा सकता है.
Union Ministry of Home Affairs has commuted death sentence of Balwant Singh Rajoana, who was sentenced to death in 2007 for assassination of former Punjab CM Beant Singh.Orders conveyed to Punjab and Chandigarh administrations. Chandigarh administration to pursue remission orders pic.twitter.com/RZhvWHzjYj
— ANI (@ANI) November 12, 2019
बलवंत सिंह राजोआना की रिहाई के लिए कई सिख संगठन, अकाली दल और सिख राजनेता पिछले कई सालों से लगातार मांग उठा रहे थे. इस मामले में बलवंत सिंह राजोआना को माफी देने के लिए एसजीपीसी की ओर से याचिका पंजाब और केंद्र सरकार को भेजी गई थी. पूर्व सीएम बेअंत सिंह को पंजाब से आतंकवाद को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है. 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर एक विस्फोट में बेअंत सिंह की मौत हो गई थी. इस हमले में 16 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी.
पंजाब पुलिस का कर्मचारी बना था मानव बम
बेअंत सिंह को मारने के लिए किए गए विस्फोट में पंजाब पुलिस का कर्मचारी दिलावर सिंह मानव बम बना था. जबकि, बलवंत सिंह राजोआना ने इस पूरी घटना की साजिश रची थी. राजोआना को इसका दोषी पाया गया था. राजोआना दिलावर के असफल होने पर बैकअप की भूमिका में था. राजोआना ने अपने बचाव में कोई वकील नहीं किया था. न ही उसने फांसी की सजा माफ करने की अपील की थी.
केंद्र सरकार ने राजोआना की फांसी पर लगा दी थी रोक
पंजाब में कई सिख संगठन, अकाली दल और सिख नेता पिछले कई सालों से राजोआना की रिहाई के लिए लगातार मांग उठा रहे थे. राजोआना की फांसी 31 मार्च, 2012 को तय की गई थी लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी. वहीं, पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय की उसकी फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था.
पंजाब-हरियाणा की राजनीति पर पड़ सकता है असर
केंद्र सरकार का यह फैसला इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब में सीटों के रूप में अपना हिस्सा बढ़ाने की मांग की थी. अभी इस पर फैसला बाकी है. हरियाणा में 10 फीसदी से ज्यादा सिखों की आबादी है. निश्चित रूप से एनडीए सरकार का यह फैसला सिख वोट बैंक पर प्रभाव डालेगा.