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राज्यसभा में कश्मीर और बलूचिस्तान मुद्दे पर रणनीति को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे सवाल

बलूचिस्तान पर अपने नेताओं की अलग अलग बयानबाज़ी ने कांग्रेस पार्टी की किरकिरी करा दी और पार्टी इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ गयी. इस बारे में पार्टी आलाकमान को भी बता दिया गया है कि, रणनीतिक चूक के चलते ही पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ गया.

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कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग आए थे बयान
कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग आए थे बयान

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बलूचिस्तान पर अपने नेताओं की अलग अलग बयानबाज़ी ने कांग्रेस पार्टी की किरकिरी करा दी और पार्टी इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ गयी. सूत्रों के मुताबिक, ऐसे में पार्टी के भीतर ही सीनियर नेताओं के एक तबके ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर पार्टी की रणनीति पर ही सवाल उठा दिए हैं. इस बारे में पार्टी आलाकमान को भी बता दिया गया है कि, रणनीतिक चूक के चलते ही पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ गया.

राज्यसभा में बिना पीएम बहस के लिए राज़ी होना बड़ी भूल
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के एक तबके का मानना है कि, कश्मीर मुद्दे पर राज्यसभा में इसी सत्र में पहले भी बहस हो चुकी थी, ऐसे में आखिरी बहस के लिए बिना प्रधानमंत्री के जवाब के पार्टी का तैयार होना रणनीतिक चूक थी. जिसका प्रधानमंत्री ने भरपूर राजनैतिक फायदा उठाया.

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वहां पार्टी इसी बात पर खुश हो गयी कि, हमने सरकार को बहस करने के लिए मजबूर कर लिया. लेकिन पीएम ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से जवाब दिलाया और खुद दूर रहे. इसी में सर्वदलीय बैठक का आनन फानन में ऐलान हो गया और अगले ही दिन बैठक भी हो गयी. सभी दलों के नेताओं से मुलाकात कर पीएम ने इक़बाल हासिल किया, आखिर में अपने भाषण में बलूचिस्तान का ज़िक्र कर दिया.

कांग्रेसी इसको भांप पाते इसके बाद इक़बाल के साथ लाल किले की प्राचीर से बलूचिस्तान को ज़ोर शोर से अपने भाषण में जगह दे दी और कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया.

तो नहीं होती ये हालत
सूत्रों का कहना है कि, नाराज़ नेताओं ने हाईकमान को बताया कि, अगर पीएम संसद में में बलूचिस्तान का ज़िक्र करते तो उनको वहीँ घेरा जा सकता था. पीएम पर कांग्रेस के कहकर हमलावर हो सकती थी कि, इसमें नयी बात क्या है, यूपीए सरकार के वक़्त पीएम मनमोहन सिंह ने भी ज़िक्र किया था, आज के हालात में आप क्या ठोस क़दम उठाएंगे.

साथ ही पार्टी ये भी याद दिला सकती थी कि, यूपीए के वक़्त जब बलूचिस्तान का ज़िक्र हुआ तब बीजेपी के नेता कितने हमलावर हुए थे, उन बयानों को याद दिलाया जा सकता था और बीजेपी से पूछा जा सकता है था कि, क्या उसने स्टैंड बदला है.

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अब पछताए होत क्या जब....
लेकिन अब कांग्रेस इस मुद्दे पर उलझ कर रह गयी है. रही सही कसर नेताओं के अलग अलग सुर ने पूरी कर दी. पार्टी रोज रोज सफाई दे रही है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद संसद का मानसून सत्र ख़त्म होने के बाद भी यही राग आलाप रहे हैं कि, राज्यसभा में 4 दफा बहस हुई और लोकसभा में भी बहस हुई, PM अपने कमरे में थे,लेकिन PM बहस में शामिल नहीं हुए, यहाँ वहां बात कर रहे हैं अपने घर में बात नहीं कर रहे हैं, पर दूसरे खेमे का यही सवाल है कि, तब क्यों बिन पीएम बहस होने दी। अगर उस दिन रणनीतिक चूक न की होती तो ये नौबत नहीं आती.

नाराज़ खेमे को आलाकमान का सख्त निर्देश
सूत्रों के मुताबिक, आलाकमान से इस मुद्दे पर नाराज़गी जताने वाले नेताओं को साफ़ कहा गया कि, जो हो गया उस पर पार्टी फोरम में चर्चा होगी. लेकिन ये वक़्त सियासी डैमेज कंट्रोल का है, ऐसे में इस पर बाहर कोई बयानबाज़ी न की जाये.

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