राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मंगलवार को रैगिंग को ‘मानवता के प्रति अपराध’ करार देते हुए छात्रों से ऐसे ‘शर्मनाक व्यवहार’ से दूर रहने को कहा.
राष्ट्रपति ने गोवा विश्वविद्यालय के 22वें वाषिर्क दीक्षांत समारोह के दौरान अपने सम्बोधन में कहा ‘‘हमारे देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं में रैगिंग बंद होनी चाहिये. यह मानवता के प्रति अपराध है. शिक्षा के जरिये छात्रों में सुसंस्कृत रवैया और समाज के प्रति जागरुकता पैदा होनी चाहिये.’’ प्रतिभा ने देश के विश्वविद्यालयों को नौकरी के बाजार की जरूरतों का आकलन करके उसके मुताबिक पाठ्यक्रम तैयार करने को कहा ताकि छात्र खुद को नियोक्ता की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार कर सकें.
राष्ट्रपति ने कहा ‘‘भारत में रोजगार के अवसरों से ज्यादा रोजगार के लिये जरूरी क्षमता की कमी की समस्या है. लोग जो क्षमता हासिल कर रहे हैं वे उन्हें रोजगार दिलाने के अनुकूल नहीं हैं, लिहाजा यह जरूरी है कि विश्वविद्यालय रोजगार के बाजार की जरूरतों का आकलन करके उस हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करें.’’ उन्होंने कहा कि उद्योग जगत और विश्वविद्यालय के बीच संवाद बेहद जरूरी है. साथ ही उच्च शिक्षा ऐसी होनी चाहिये जो युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिये प्रेरित करे.