कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अपनी चुप्पी तोड़ी. मुद्दा था महंगाई और बढ़ती कीमतों का. जिसपर लोकसभा में नियम 193 पर चर्चा हुई. कांग्रेस की तरफ ने राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला और पीएम मोदी पर कुछ उन्हीं के अंदाज में निशाना साधा. राहुल ने प्रधानमंत्री के चुनावी वादों और जुम्लों को दोहराया जो उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ प्रचार में इस्तेमाल किए थे.
राहुल ने कहा कि देश में महंगाई बहुत बड़ी समस्या है. किसान 50 रुपये प्रति किलो दाल बेचता है लेकिन खरीदता 180 रुपये में है. प्रधानमंत्री मोदी पर तंज करते हुए उन्होंने कहा, 'चौकीदार की नाक के नीचे दाल की चोरी हो रही है और चौकीदार चुप है. अब आप पीएम बन गए हैं बड़े आदमी बन गए हैं. चौकीदारी छोड़िए, वो हम कांग्रेस वाले कर लेंगे.'
राहुल ने मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुचाने के लिए किसान के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया. राहुल ने कहा कि जब कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल था, तब हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसानों का 70 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया था. अब कच्चा तेल 44 डॉलर प्रति बैरल है. पिछले साल सरकार ने बड़े उद्योगपतियों का 52 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया.
हर-हर मोदी की जगह अरहर मोदी
अपने पूरे भाषण में राहुल ने बार-बार पीएम मोदी पर हमला बोला और अंत में हर-हर मोदी के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव से पहले घर-घर मोदी का नारा चला था, अब गांव-गांव में एक नया नारा चल रहा है. बच्चा-बच्चा कह
रहा है अरहर मोदी...अरहर मोदी...अरहर मोदी.
राहुल को जेटली का जवाब
राहुल के आरोपो के जवाब में उतरे वित्त मंत्री अरुण जेटली. जेटली ने एक-एक कर राहुल और पिछली यूपीए सरकार को महंगाई के लिए जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि जरूरी चीजों का दाम नारों से नहीं बल्कि डिमांड और सप्लाई से तय
होता है. राहुल ने कहा था कि वो तारीख बताएं, जब चीजों के दाम कम हो जाएंगे. इसके जवाब में जेटली ने कहा, 'महंगाई कम करने की तारीख नहीं, बल्कि इसे कम करने की नीतियों को बताना जरूरी है. हमारी सरकार ने दाल की पैदावार
बढ़ाने के लिए नीतियों में बदलाव किया. महंगाई घटाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.'
जेटली ने कहा कि दाल की कीमतों में आई उछाल के लिए उसमें भ्रष्टाचार ढूंढना सही नहीं है. जेटली ने कहा, 'यह तो विडंबना है कि आज दो साल मोदी सरकार के होने के बावजूद जो भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वो यूपीए सरकार के हैं. हमने दो डिजिट में महंगाई दर मिली थी. हमें इसे नियंत्रण करने में कामयाबी मिली.'
पिछले दो साल में दाल की कमी रही
जेटली ने कहा, 'अगर आप दाल की एमएसपी बढ़ा देंगे, लेकिन दाल की पैदावार न हो या बरसात न हो तो क्या होगा. बीते दो साल हमारी अर्थव्यवस्था पर वजन रहे हैं. अच्छी बारिश नहीं हुई. इस देश में 23 मिलियन टन दाल की जरूरत है.
जो पैदावार हुई वो 17 मिलियन टन थी. जो यह 6 मिलियन टन कम है, वो हम दुनिया से खरीदते हैं. पिछले दो साल में दुनिया के बाजार में दाल की कमी रही है. गंभीर हालत होने पर कुछ व्यापारियों ने हाल की जमाखोरी शुरू दी. इसके
लिए सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी. जिसके बाद दाल के दाम कुछ कम हो गए.'