सोनिया गांधी की बीमारी के चलते दूसरा मौके था जब किसी और को कांग्रेस मुख्यालय में झंडा फहराना था. 2011 में कांग्रेस के सीनियर नेता मोतीलाल वोरा ने ये जिम्मेदारी निभाई थी, लेकिन तब ओहदे में राहुल महज महासचिव थे. इसलिए उन्होंने खुद वोरा जी से झंडा फहराने की गुजारिश की थी. अब वो पार्टी उपाध्यक्ष हैं और जल्दी अध्यक्ष बनने वाले हैं. इसलिए अबकी बार राहुल ने ही झंडा फहराया.
राहुल आए तो खूब सजा मुख्यालय
राहुल कांग्रेस मुख्यालय आए तो उनके साथ सोनिया के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल आए. झंडारोहण स्थल तक मुख्यालय के प्रभारी मोतीलाल वोरा लेकर आए. यानी सिर्फ सोनिया की जगह राहुल थे. पहले के मुकाबले
पार्टी दफ्तर की सजावट बेहतर थी. आखिर मौका कांग्रेस के भविष्य का जो था. राहुल भी क्लीन शेव, सर पर गांधी टोपी और सफेद कुर्ते पैजामे में थे. झंडारोहण हुआ, राष्ट्रगीत हुआ, झंडा ऊंचा रहे हमारा गीत हुआ और
फिर राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम खत्म हुआ. फिर राहुल ने सभी लोगों से मुलाकात की और मनमोहन के साथ मिलकर बच्चों को मिठाई बांटी.
नेताओं से मिलकर राहुल ने छेड़ा मोदी राग
इसके बाद राहुल ने पार्टी नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक राहुल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप लोगों ने पीएम का भाषण सुना, क्या रहा? फिर क्या था, एक-एक करके नेताओं ने
मोदी को राहुल के सामने निशाने पर लिया. बलूचिस्तान पर अहमद पटेल ने राहुल के सामने कहा कि कांग्रेस को अपनी लाइन पाकिस्तान के खिलाफ रखनी चाहिए. यही कहना चाहिए कि पाकिस्तान की कश्मीर पर की
जा रही बयानबाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती. पाकिस्तान अपने यहां के हालात को देखे.
अम्बिका और आजाद भी बोले
इसके बाद अम्बिका सोनी ने कहा कि विकास और वायदों के मुद्दे पर पीएम फेल हो रहे हैं. इसलिए अब बलूचिस्तान का जिक्र कर सियासी दांव चल रहे हैं. वहीं आजाद ने कहा कि पीएम के स्पीच का स्तर पीएम का
नहीं है.
भिड़े आनंद शर्मा और शकील उज्जमा अंसारी
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद मोर्चा आनंद शर्मा ने संभाला. मोदी के भाषण की हर बात का विस्तार से विश्लेषण करने लगे. आपस में कांग्रेसी बात करने लगे कि आनंद तो नम्बर बढ़ाने में जुट गए. इसी बीच कांग्रेस नेता
शकील उज्जमा ने आनंद शर्मा को टोका और बोलने से रोक दिया. शकील ने कहा कि आनंद जी आप छोटी-छोटी बातों का विश्लेषण किए जा रहे हैं लेकिन बड़ा मामला कुछ और है. शकील फिर राहुल से मुखातिब हुए
और बोले कि मोदी ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान का जिक्र करके हिंदुस्तान में अपनी हिंदुत्व की छवि और हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. जिससे निपटना पार्टी की प्राथमिकता होनी चाहिए. आप इस बारे में
सोचिए और रोडमैप बनाइए.
मनमोहन बोले- हमारी सरकार की योजनाएं ही गिना रहे हैं मोदी
अमूमन कम बोलने वाले पूर्व पीएम मनमोहन ने भी राहुल के सामने मोदी पर चुटकी ली. मनमोहन ने कहा कि मोदी सरकार यूपीए सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ा रही है. कुछ का नाम बदल रही है लेकिन श्रेय खुद
ले रही है.
मोदी के भाषण पर सबकी सुनकर भी चुप रहे राहुल
राहुल ने भले ही खुद मोदी के भाषण पर अपने नेताओं की प्रतिक्रिया ली. लेकिन खुद खामोश रहे. ना बंद कमरे में कुछ बोले और ना बाहर मीडिया के सामने, हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि लाल किले से
मोदी नहीं देश के पीएम भाषण दे रहे थे. इसलिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व होने के नाते आजादी के दिन न सोनिया जवाब देती हैं और न राहुल.
एक मौका ऐसा भी जब सीनियर नेता ने भूल सुधार कराई
राहुल के लिए इस खास मौके पर सब कुछ ठीक रहा. लेकिन एक मौका ऐसा आया जब वरिष्ठ नेता दबी जुबां से बोले कि राहुल को सीनियर नेताओं को साथ लेकर चलना चाहिए. तभी उनका और पार्टी का भला होगा.
दरअसल हुआ ये कि राहुल ने जब झंडा फहराया तो वो पूरे शबाब पर नहीं लहरा. रस्सी ठीक तरीके से नहीं सेट हो पाई. कार्यक्रम चलता रहा. बाद में वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी जो बतौर संगठन महासचिव राहुल के
पीछे खड़े थे. वो आगे आए और इशारा किया कि रस्सी की सेटिंग ठीक करने ने झंडा बेहतर तरीके से लहराएगा. राहुल के साथ खड़े कांग्रेस सेवादल के मुखिया महेंद्र जोशी ने फौरन जनार्दन की बात पर अमल किया और
तिरंगा झूम के लहरा उठा. दबी जुबान से कांग्रेसी बोलते दिखाई दिए कि अगर यूंही राहुल सीनियर नेताओं की सलाह भी ठीक से लेते रहें तो मुरझाई कांग्रेस की सियासी फसल भी लहलहा उठेगी.