आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे में 2007 से लेकर 2012 की अवधि में औसतन हर पांचवें दिन रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने की घटना सामने आई. आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल, 2007 से 31 मार्च, 2012 के बीच रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने की 400 दुर्घटनाएं घटीं जिनमें 115 लोगों की जान चली गयी और 800 लोग घायल हो गये. इसका मतलब है कि लगभग हर पांचवें दिन एक हादसा हुआ.
सर्वाधिक हादसे 2007 से 2008 के दौरान हुए. इस अवधि में इस तरह की 100 दुर्घटनाएं सामने आईं जिनमें 13 यात्रियों की मृत्यु हो गई और 145 घायल हो गए.
मुरादाबाद के सलीम बेग ने आरटीआई अर्जी के माध्यम से जो जानकारी हासिल की है, उसके मुताबिक 2008-09 में रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने के मामले अपेक्षाकृत कम रहे. इस दौरान 85 ऐसे हादसे हुए जिनमें 10 लोगों की जान चली गई और 142 लोग जख्मी हो गए. 2009-10 में 80 घटनाओं में 14 लोग मारे गए और 91 घायल हो गए.
साल 2011-12 के आंकड़ों में एक बड़ी दुर्घटना का जिक्र है जो फतेहपुर के पास घटी. इसमें दिल्ली की ओर जा रही हावड़ा-कालका मेल पटरी से उतर गई थी और इस भयावह हादसे में 71 लोगों की मौत हो गई थी तथा 268 लोग घायल हो गये थे.
जवाब में जन सूचना अधिकारी वीडी शर्मा ने कहा, ‘भारतीय रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और दुर्घटनाओं को रोकने तथा सुरक्षा बढ़ाने के लिए नियमित आधार पर संभावित कदम उठाए जाते हैं.’