सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर अदालत को लगता है कि रेप के दोषी की सजा कम करने के लिए पर्याप्त और विशेष वजह है, तो बलात्कारी की सजा कम की जा सकती है.
न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल और न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोस की खंडपीठ ने हालांकि 20 साल पुराने बलात्कार के मामले में रवींद्र को दोषी माना, लेकिन जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाते हुए उसे रिहा करने का आदेश दे दिया. अदालत ने ऐसा करते समय ‘पर्याप्त और विशेष’ वजहों के मद्देनजर इस तथ्य पर विचार किया कि केस काफी लंबा खिंचा था और दोषी तथा पीड़ित दोनों की ही अलग-अलग शादी हो चुकी है. अदालत ने इसके साथ ही दोनों के बीच समझौता हो जाने के तथ्य को भी महत्व दिया. IPC की धारा 376 (2G) में प्रावधान है कि कोर्ट पर्याप्त और विशेष कारणों का फैसले में जिक्र करते हुए दस साल से कम की कैद की सजा सुना सकते हैं.
जजों ने कहा, 'हमारी राय है कि अपनी करने वाले का प्रकरण कम सजा देने के लिये धारा 376 (2G) का प्रावधान लागू करने का उचित मामला है क्योंकि यह घटना 20 साल पुरानी है और संबंधित पक्षों का विवाह हो चुका है तथाउनमें समझौता हो गया है. इसलिए यह पर्याप्त और विशेष कारण हैं.' रवीन्द्र को 24 अगस्त, 1994 को खेत में काम कर रही एक महिला से बलात्कार के जुर्म में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रवीन्द्र की अपील 2013 में खारिज करते हुए पहले की तरह दोषी माना था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य पर सहमति जताई कि रवीन्द्र और पीड़ित के बीच समझौता हो गया है. वह दोषी के खिलाफ मामला आगे न बढ़ाकर इसे बंद करना चाहती है क्योंकि अब दोनों की अलग-अलग शादी हो चुकी है और उनके घर बस चुके हैं.
-इनपुट भाषा से