माउंट एवरेस्ट को फतेह करने के तत्काल बाद नीचे उतरते हुए निर्धारित रूट से गिरने से भारतीय पर्वतारोही रवि कुमार की मौत हो गई. मुरादाबाद के रहने वाले 27 वर्षीय पर्वतारोही रवि कुमार ने 20 मई को माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था. उसके बाद नीचे उतरते वक्त वो लापता हो गए.
नेपाल पर्यटन विभाग के डायरेक्टर जनरल दीपक भट्टाराई के मुताबिक रवि कुमार वक्त 8200 मीटर की ऊंचाई पर थे तो फिसल गए. इस जगह को बॉलकनी कहा जाता है. रूट से 200 मीटर नीचे जा गिरने से उनकी मौत हो गई.
शेरपाओं ने उस जगह को स्पॉट कर लिया है, जहां रवि कुमार का शव है. रवि कुमार अपने गाइड के साथ शनिवार दोपहर को 1 बजकर 28 मिनट पर माउंट एवरेस्ट (8,850 मीटर, 29,035 फीट) पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने लौटना शुरू किया. नीचे उतरते वक्त उनकी तबीयत खराब हो गई. रवि कुमार सबसे नजदीकी कैंप साउथ कोल (8,000 मीटर, 26,247 फीट) तक नहीं पहुंच पाए. उनके गाइड नेपाली शेरपा की भी तबीयत खराब हो गई थी लेकिन वो किसी तरह कैंप तक पहुंचने में कामयाब रहा.
जिस वक्त रवि कुमार लौट रहे थे, वो वक्त पर्वतारोहियों के लौटने के हिसाब से देरी वाला था. उस वक्त वहां आसपास कम ही पर्वतारोही मौजूद थे. बीते सप्ताहांत माउंट एवरेस्ट के आसपास अमेरिका, स्लोवाकिया और ऑस्ट्रेलिया के एक-एक पर्वतारोही की भी मौत हुई.
माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहण का सीजन मार्च से मई तक होता है. इस बार मौसम खराब रहने की वजह से पर्वतारोहण का सीजन देर से शुरू हुआ. सीजन खत्म होने को कुछ ही दिन रह जाने की वजह से पिछले कुछ दिनों में एवरेस्ट चढ़ने वाले पर्वतारोहियों की संख्या में इजाफा हुआ था. इस सीजन में अब तक 5 पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है.
रवि कुमार मुरादाबाद जिले में 'भोला सिंह की मिलक' के रहने वाले थे. उनके पिता हरकेश ने बताया कि रवि की हमेशा से माउंट एवरेस्ट को फतेह करने की इच्छा रही थी. जब रवि ने माउंट एवरेस्ट से उतरना शुरू किया तभी से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था. रवि के कोच ने बताया था कि रवि के सेलफोन का पता लग गया है. रवि 23 मार्च को घर से रवाना हुए थे.
रवि के बड़े भाई मनोज के मुताबिक रवि से उनकी आखिरी बार बात 16 मई को हुई थी, तब वो फाइनल सम्मिट के लिए निकल रहे थे. रवि कुमार के लापता होने की खबर मिलने के बाद से ही फेसबुक पर उनकी सलामती के लिए दुआएं की जा रही थीं.