इंदौर और पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल के बीच चलने वाली पटना एक्सप्रेस पुखरायां के पास पटरी से उतर गई. इस हादसे में करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत हुई है. पटरी से रेलगाड़ी उतरने की किसी दुर्घटना में इतने लोगों की मौत हो जाना निश्चित तौर पर सबको चौकाता है. अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि रेल हादसे में इतने ज्यादा लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. इस रेल हादसे के बारे में और कुछ बताने से पहले हम बता दें कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने संसद में इस पर दिए गए अपने बयान में क्या कहा.
सुरेश प्रभु ने इस घटना की जांच करके दोषियों को सजा दिलाने की बात कही है. लेकिन अपने बयान में रेल मंत्री ने इस रेल हादसे में इतना ज्यादा नुकसान होने के पीछे जो वजह बताई है वह है पुरानी तकनीक के आईसीएफ कोच. वैसे तो आईसीएफ कोच जिस तकनीक पर बने हुए हैं वो बीते जमाने की चीज है. रेलवे को सेफ्टी और सिक्योरिटी के मामले में सुझाव देने के लिए बनी अनिल काकोडकर कमेटी की रिपोर्ट में आईसीएफ कोच को भारतीय रेलवे से पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की गई थी. इस सिफारिश को हुए 4 साल हो गए हैं, लेकिन अभी भी रेलवे में ज्यादातर डिब्बे आईसीएफ तकनीक के हैं. इस तरह के डिब्बों में बोगी के ऊपर डिब्बा रखा होता है. बोगी और डिब्बे के बीच में जुड़ाव बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होता है. ऐसे में जब ऐसे डिब्बों से बनी हुई ट्रेन पटरी से उतरती है तो यह डिब्बे बोगी से अलग हो जाते हैं. इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि रेलगाड़ी के डिब्बे में पहियों समेत निचला हिस्सा अलग हो जाता है. इस वजह से इन डिब्बों के पलटने का खतरा ज्यादा होता है.
कई ट्रेनों में लगे जर्मन तकनीक के डिब्बे
इसके अलावा पुरानी तकनीक के इन डिब्बों में एक दूसरी खामी यह है कि इनकी कपलिंग स्क्रू कपलिंग है. इस वजह से जब यह डिब्बे पटरी से उतरते हैं तो एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं. इस प्रक्रिया में कोई भी दो डिब्बे एक दूसरे को चीरते हुए अंदर तक घुस जाते हैं। ऐसी स्थिति में डिब्बों में बैठे हुए यात्रियों का कचूमर निकल जाता है. इससे हादसे में मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है. शायद यही वजह है की काकोडकर कमेटी ने इन डिब्बों को भारतीय रेलवे से पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की थी. लेकिन बजट ना होने की वजह से भारतीय रेलवे में ज्यादातर ट्रेनों में पुरानी तकनीक के आईसीएफ डिब्बे ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इस समय देशभर में तकरीबन 53 हजार आईसीएफ डिब्बे दौड़ रहे हैं. भारतीय रेलवे ने जर्मन तकनीक पर बने एलएचबी कोच चलाने का सिलसिला शुरू कर दिया है. देशभर की कई ट्रेनों में इनको लगाया जा चुका है. लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है.
...ऐसे हुआ हादसा
आइए अब हम आपको ले चलते हैं रविवार को हुए रेल हादसे की तरफ. जानकारों के मुताबिक इस रेल हादसे में 14 डिब्बे पटरी से उतरे, जिनमें से कई डिब्बे उलट-पुलट हो गए और चकनाचूर हो गए. रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार के मुताबिक सरसरी तौर पर देखें तो यह हादसा पटरी से डिब्बे उतरने की वजह से मालूम पड़ता है. उनके मुताबिक अगर आप गौर से पूरे हादसे पर नजर दौड़ाएं तो आप पाएंगे पटरी में किसी खराबी की वजह से रेलगाड़ी उल्टी है. जैसा की नजर आ रहा है की रेलगाड़ी का इंजन सेफ है. पटरी में क्रेक होने की स्थिति में इंजन और उससे लगी हुई कोचेज तेजी से आगे निकल सकते हैं और पिछले डिब्बे इस वजह से पटरियों से उतर सकते हैं. जब इंजन और अगले डिब्बे टूटी पटरी से आगे निकल चुके थे जो पिछले डिब्बे पटरी से उतर गए. रेल हादसे की तस्वीरें देखकर स्थिति और ज्यादा साफ होती हैं. इसमें साफ तौर पर दिखता है कि आईसीएफ कोच की बोगी अलग हो गई और ऊपरी डिब्बा अलग. साथ ही साथ तेज गति से चलती हुई ट्रेन में लगे हुए पिछले डिब्बे जब पटरी से उतरे तो इन डिब्बों में लगा हुआ एयर प्रेशर का पाइप भी टूट गया, इससे दबाव कम होने की वजह से इंजन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग गए. रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक जिस समय रेल हादसा हुआ उस समय ट्रेन की स्पीड 107 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. इतनी स्पीड में अचानक ब्रेक लगने से पीछे के कई डिब्बे उछलकर आगे की तरफ चल दिए. ऐसे में एक डिब्बा दूसरे डिब्बे में घुस गया. इस वजह से इन डिब्बों में बैठे हुए लोगों का नामोनिशान मिट गया.
इन सबके बीच पटना एक्सप्रेस के ड्राइवर के मुताबिक ट्रेन को चलाने में आवाज आ रही थी और ऐसे में ड्राइवर ने झांसी स्टेशन पर इसकी सूचना दी लेकिन उस ड्राइवर को यह कहा गया कि इस खराबी को आगे किसी स्टेशन पर ठीक कर दिया जाएगा. इन स्थितियों में ऐसा माना जा रहा है हो सकता है चलती ट्रेन का एक्सेल ही जाम हो गया हो. अगर ऐसा हुआ होगा तो जांच में यह बात साफ तौर पर सामने निकलकर आएगी. लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ भी तो जिस तरह की रेल दुर्घटना हो गई है तो वह नहीं हो पाती.
हादसे के पीछे हो सकती है साजिश
दूसरी तरफ ऐसा कहा जा रहा है कि इस समय मौसम में बदलाव हो रहा है और इस वजह से रात और दिन के तापमान में काफी अंतर है. जब ऐसी स्थिति बनती है तो रेल की पटरियों में फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है. इस तरह की स्थिति से बचने के लिए रेलवे अपने गैंगमैन पटरियों पर चलाती है इससे समय रहते किसी फ्रैक्चर को आसानी से पकड़ा जा सकता है. प्रथमदृष्टया ऐसा देखने पर नहीं हुआ. इन सबके बीच रेल हादसे को लेकर एक कांस्पीरेसी थ्योरी भी चर्चा में है. कुछ लोगों का मानना है कि हो ना हो यह कुछ लोगों की शरारत का नतीजा है. लेकिन जानकारों की माने उनका कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत ज्यादा जल्दबाजी होगी. रेल मंत्रालय ने इस मामले की तह तक जाने के लिए एक स्वतंत्र जांच की घोषणा कर दी है. कमिश्नर रेलवे सेफ्टी की अध्यक्षता में इस रेल हादसे की जांच की जाएगी.