बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व कर्नाटक के संकट का समाधान तलाशने में जुटा है, लेकिन मुख्यमंत्री औऱ विरोधी खेमे के बीच सुलह का जो फॉर्मूला बन रहा है, वो सीएम येदियुरप्पा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.
नहीं जाएगी येदियुरप्पा की कुर्सी
कर्नाटक बीजेपी के भीतर मचे घमासान में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की कुर्सी नहीं जाएगी, ये बात तो तय हो चुकी है, लेकिन मुमकिन है कि उनकी कुर्सी की ताकत पहले जैसी न रहे. आलाकमान येदियुरप्पा और उनके विरोधी खेमे के रेड्डी बंधुओं के बीच सुलह कराने में जुटा है. समझौते का जो फॉर्मूला पेश किया है, वो एक तरह से मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के पर कतरने जैसा है.
विरोधियों की शिकायतों पर ध्यान
फॉर्मूले के मुताबिक येदियुरप्पा के बेहद खास औऱ ग्रामीण विकास मंत्री शोभा करांड़लाजे को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. रेड्डी बंधुओं की शिकायत रही है कि शोभा उनके मंत्रालय के कामों में भी दखलंदाजी करती है. करुणाकर रेड्डी को राजस्व मंत्रालय से ज्यादा ताकतवर गृहमंत्रालय का जिम्मा सौंपा जाएगा.
येदियुरप्पा की हैसियत को बड़ा झटका
साथ ही सभी बड़े फैसलों के लिए एक कोर कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें येदियुरप्पा और करुणाकर रेड्डी के अलावा दोनों खेमों से कुछ मंत्री और पार्टी के महासचिव अनंत कुमार, प्रदेश अध्यक्ष सदानंद गौड़ा को भी शामिल किया जाएगा. लौह अयस्कों पर टोल घटाया जाएगा. हाल ही में येदियुरप्पा ने इसे बढ़ाकर प्रति ट्रक 1000 रुपये करने का प्रस्ताव किया था. जाहिर है अगर येदियुरप्पा और रेड्डी बंधुओं के बीच इस फॉर्मूले पर सहमति हो गई, तो मुख्यमंत्री के तौर पर येदियुरप्पा की हैसियत को बड़ा झटका लग सकता है.