संविधान के अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार आमने सामने आ गए हैं. मंगलवार को पदभार संभालने वाले पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर चर्चा के लिए तैयार है. इसके कुछ देर बाद जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने जितेंद्र सिंह के बयान को गैर जिम्मेदाराना करार दिया.
अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, 'या तो जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होगा या अनुच्छेद 370 का अस्तित्व रहेगा.' उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की वजह से ही कश्मीर शेष भारत से जुड़ा हुआ है. उमर ने अपने इस ट्वीट को सुरक्षित रखने की बीजेपी को सलाह देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 वापस लेने की बात न केवल जानकारी के अभाव के आधार पर है बल्कि गैर जिम्मेदाराना भी है.
So the new MOS PMO says process/discussions to revoke Art 370 have started. Wow, that was a quick beginning. Not sure who is talking 1/n
— Omar Abdullah (@abdullah_omar) May 27, 2014
Mark my words & save this tweet - long after Modi Govt is a distant memory either J&K won't be part of India or Art 370 will still exist 2/n
— Omar Abdullah (@abdullah_omar) May 27, 2014
Art 370 is the ONLY constitutional link between J&K & rest of India. Talk of revocation of not just ill informed it's irresponsible. 3/3
— Omar Abdullah (@abdullah_omar) May 27, 2014
उमर अब्दुल्ला के बयान पर बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने प्रतिक्रिया जाहिर की.
Like any other issue, it's best for the health of our nation that Article 370 giving special status to J&K be open to public debate. #India
— Rajyavardhan Rathore (@Ra_THORe) May 27, 2014
इससे पहले, जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इस प्रक्रिया के जरिए जो असहमत हैं, उन्हें समझाने की कोशिश की जाएगी.Indians have bled enough for J&K to belong to anyone else but India. Should a debate be struck down by CM J&K by an ultimatum to break away?
— Rajyavardhan Rathore (@Ra_THORe) May 27, 2014
गौरतलब है कि मोदी ने पिछले साल राज्य में एक रैली के दौरान अनुच्छेद 370 पर चर्चा का मुद्दा उठाया था. सिंह ने मोदी की उस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'उनकी (मोदी) और सरकार की इच्छा है कि हम इस पर चर्चा करें जिससे कि हम अनुच्छेद 370 से हो रहे नुकसान के बारे में असहमत लोगों को समझा सकें. अगर हम चर्चा ही नहीं करेंगे तो हम उन लोगों को कैसे समझा सकेंगे कि अनुच्छेद 370 के चलते वे किन चीजों से वंचित रह गए.'
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 भौतिक से कहीं अधिक मनोवैज्ञानिक बाधा है और मोदी सरकार इसे वापस लेने से होने वाले फायदा और नुकसान के बारे में युवकों सहित सब हित धारकों से चर्चा के लिए तैयार है.
पीडीपी ने भी की आलोचना
जम्मू-कश्मीर की एक और पार्टी पीडीपी ने भी जितेंद्र सिंह के इस बयान की आलोचना की. पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'प्रधानमंत्री से आग्रह है कि अनुच्छेद 370 पर ऐसी आवाजों पर लगाम लगाएं. यह दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले मंत्री ने कार्यभार संभालने के पहले दिन ही इस तरह की टिप्पणी की.
हालांकि, बवाल बढ़ने पर जितेंद्र सिंह ने सफाई दी कि अनुच्छेद 370 पर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. उन्होंने कहा, 'मैंने पीएम नरेंद्र मोदी के हवाले से कुछ भी नहीं कहा है. इस मसले पर बवाल बेबुनियाद है.'