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गणतंत्र दिवस पर बोले भागवत- संविधान ने हर नागरिक को राजा बनाया, लेकिन अनुशासन जरूरी

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि समर्थ, वैभवशाली और परोपकारी भारत के निर्माण को ध्यान में रखकर गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. कर्तव्य बुद्धि से किया गया कार्य ही इस लक्ष्य को प्राप्त कराएगा. देश और विश्व उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा.

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संघ प्रमुख मोहन भागवत (फोटो-पीटीआई)
संघ प्रमुख मोहन भागवत (फोटो-पीटीआई)

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  • गोरखपुर में मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा
  • 'संविधान में देश का हर नागरिक राजा'
  • वैभवशाली, परोपकारी भारत का आह्वान

राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत के संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है. इस राजा के पास अधिकार हैं लेकिन अधिकारों के साथ सबके लिए अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करना जरूरी है.

मोहन भागवत यूपी के गोरखपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए. यहां उन्होंने तिरंगा फहराया. इसी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने भाषण दिया.

देश का हर नागरिक राजा

उन्होंने कहा, "संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है. राजा के पास अधिकार हैं लेकिन अधिकारों के साथ सब अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करें. तभी देश को स्वतंत्र कराने वाले क्रांतिकारियों के सपनों के अनुरूप भारत का निर्माण होगा." उन्होंने कहा कि इस पहल से ही ऐसे भारत का निर्माण होगा, जो दुनिया और मानवता की भलाई को समर्पित होगा.

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संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि, "समर्थ, वैभवशाली और परोपकारी भारत के निर्माण को ध्यान में रखकर गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. कर्तव्य बुद्धि से किया गया कार्य ही इस लक्ष्य को प्राप्त कराएगा. देश और विश्व उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेगा. "

बल का उपयोग दुर्बलों की रक्षा में हो

संघ प्रमुख ने समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने पर जोर देते हुए कहा कि RSS अपनों के लिए जीता है, और समाज में सबसे निचले पायदान पर खड़े लोग ही उसके अपने हैं. उन्होंने कहा, "रावण भी ज्ञानवान था, लेकिन उसके सोचने की दिशा गलत थी और एक राष्ट्र का विनाश हो गया. इसलिए विद्या का उपयोग ज्ञान-ध्यान में करें. बल का उपयोग दुर्बलों की रक्षा और धन का उपयोग गरीबों की सेवा में करें."

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संघ प्रमुख ने कड़ी मेहनत कर समृद्धि अर्जित करने को सही बताया और कहा कि भारत 'वसुधैव कुटुम्बकम' के भाव को आदिकाल से लेकर चल रहा है, इसलिए इसका उपयोग संसार के सभी जरूरतमंदों के हित में किया जाना चाहिए. इस दौरान उन्होंने 'वैभवशाली, समर्थ और परोपकारी भारत' का आह्वान किया.

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